चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र ने शनिवार को जींद स्थित हामेटी में संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंघाल ने किसानों को उर्वरकों के वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग के महत्व से अवगत कराया।
डॉ. पंघाल ने कहा कि वर्तमान में उर्वरकों के अंधाधुंध और असंतुलित प्रयोग के कारण मिट्टी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। इससे न केवल सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो रही है बल्कि खेती की लागत भी बढ़ रही है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे हमेशा मृदा परीक्षण करवाएं और रिपोर्ट के आधार पर ही पोषक तत्वों का प्रबंधन करें।
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उन्होंने कहा कि उर्वरक प्रबंधन के चार आर सिद्धांतसही स्रोत, उचित मात्रा, सही समय और सही विधि पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन सिद्धांतों को अपनाकर फसल उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है और पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
डॉ. पंघाल ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर न रहकर जैविक और हरी खाद का भी संतुलित उपयोग करने का सलाह दी। कार्यक्रम में किसानों को पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान के बारे में भी जानकारी दी गई।