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आत्मा का परमात्मा में रूपांतरण का मार्ग है उपासना : आचार्य

Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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01जेएनडी28-माता वैष्णवी धाम में प्रवचन सुनती महिलाएं। स्रोत पुजारी
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जींद। आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि उपासना-दुर्वासना को मिटाती है। चिंता, भय व घृणा की व्यथा को हटाती है। ईर्ष्या व तृष्णा की जलन को शांत करती है। आत्म शांति का मार्ग है उपासना।
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यह बात आचार्य पवन शर्मा ने देवोत्थान एकादशी की सुबह शनिवार को माता वैष्णवी धाम में चल रहे कार्तिक महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष कहे। भजन-कीर्तन द्वारा महिलाओं ने अपने प्रभु को खूब रिझाया।
आचार्य ने कहा कि किसी व्यक्ति की उपासना सच्ची है या नहीं इसका एक ही मापदंड है कि उपासना के फलस्वरूप साधक की अंतरात्मा में संतोष, सहनशीलता, प्रफुल्लता, शांति व सद्भावना का कितनी मात्रा में अवतरण हुआ है।
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यदि उपासना के बाद भी उक्त सद्गुणों का प्रवेष उसके जीवन में नहीं हो पाया व उसे दीन-हीन वृत्तियां घेरे हुए हैं तो समझ लेना कि वह व्यक्ति कितना ही पूजा-पाठ क्यों न करता हो उपासना से अभी कोसों दूर है।
आचार्य ने कहा पूजा-पाठ करना अलग बात है व उपासना अलग है। अपनी कठिनाईयों को हल करने अथवा अपनी सुविधाओं को बढ़ाने की लालसा मात्र से जो प्राणी ईश्वर से प्रार्थना अथवा उनकी पूजा करते हैं वे उपासना के तत्व ज्ञान में अभी बहुत पीछे हैं।
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उपासना तो आत्मा व परमात्मा के मिलन का एक माध्यम है, नर से नारायण, पुरुष से पुरुषोत्तम और आत्मा का परमात्मा में रूपांतरण का मार्ग उपासना है।
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