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मांगों को लेकर मजदूरों और कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

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कपास मंडी के गेट पर ताला लगाते सीटू के सदस्य। संवाद - फोटो : Jind
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सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के कार्यालय का घेराव किया। कपास मंडी में किसान सेवा केंद्र के पास भारी संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सुरक्षा की दृष्टि से यहां पर पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई हुई थी। कर्मचारियों ने मांगों को लेकर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के नाम एसडीएम प्रीतपाल को सौंपा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीटू जिला प्रधान सतबीर खरल ने की।
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वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों व कच्चे कर्मचारियों की मांगों और समस्याओं के समाधान की मांग ज्ञापन के माध्यम से की गई है। प्रदेश के मजदूरों व सरकारी विभागों में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार आंदोलन के बावजूद भी उनकी मांगों का समाधान नहीं हो रहा है। जो मांग कर्मचारियों की हैं, उनका समाधान होने के साथ-साथ विभागीय यूनियनों को बातचीत के लिए सरकार बुलाए व मांगों का तुरंत हल करें। सतबीर खरल ने कहा कि कपास मंडी में किसान सेवा केंद्र के गेट पर ताला लगाया गया है। इस ताले की चाबी सिरसा में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आवास पर भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि श्रम कल्याण बोर्ड में न तो पंजीकरण हो रहा है और न ही सुविधाओं के लाभ मिल रहे हैं। अनाप-शनाप शर्तें लगाकर निर्माण के मजदूर कारीगरों को धक्के खिलवाए जा रहे हैं। पंजीकृत मजदूर अपने 90 दिन के काम के सत्यापन के लिए ग्राम सचिव, पटवारी, कनिष्ठ अभियंता, तहसीलदार के यहां जाते हैं तो वह यह काम करने से मना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों ने दो-दो साल से अपनी बेटियों के कन्यादान के फार्म भरे हुए हैं, लेकिन उनको आज तक लाभ नहीं मिला है। जबकि सरकार यह भी दावा करती है कि हम शादी से तीन दिन पहले कन्यादान देंगे, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। निर्माण के मजदूरों में सरकार के प्रति भारी रोष है। संदीप जाजवान ने कहा कि सरकार जानबूझ कर निर्माण मजदूरों को लाभ से वंचित कर रही है ताकि जो श्रम कल्याण बोर्ड में 4000 करोड़ रुपये जमा है उसको पूंजीपति लोगों पर खर्च किया जा सके। सरकार ने निर्माण मजदूरों के कानून को बदलकर सामाजिक सुरक्षा कोड में बदल दिया और अब देश भर के निर्माण बोर्डों में जमा पैसे को सरकार हड़पने पर तुली हुई है।
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उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एक तरफ तो लंबे समय से हमारी मांगों का समाधान नहीं किया जा रहा, दूसरी तरफ सरकार ने किसानों ने बर्बाद करने के लिए कृषि कानून बनाए हैं। इसके विरोध में किसान पिछले लगभग ढाई महीने से दिल्ली सीमा पर दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगो को नहीं सुन रही। यूनियन की मांग है कि निर्माण मजदूरों का श्रम कल्याण बोर्ड में पंजीकरण किया जाए। 90 दिन के काम की तसदीक का अधिकार यूनियनों को दिया जाए। बिना शर्त निर्माण मजदूरों की रुकी हुई सुविधा की राशि जारी की जाए। सभी निर्माण मजदूरों के राशन कार्ड बनवाए जाए तथा प्रति परिवार 7500 रुपये मासिक व प्रति व्यक्ति दस किलो राशन दिया जाए। बिजली संशोधन बिल-2020 वापस लिया जाए। इस मौके पर सुरेखा, ऊषा रानी, कश्मीर सिंह सेलवाल, सुमन, वीरेंद्र, संदीप जाजवान, बारूराम, सिल्क राम, सुरेश, रघुबीर, शकुंतला, करतार, राधेश्याम, मोहन, विक्रम, राजेश, नरसी नंबरदार, अनिता, सुमन दनौदा, बलराज व रणधीर भी मौजूद रहे।

कपास मंडी में धरने पर पहुंचे मजदूर और कर्मचारी। संवाद।- फोटो : Jind

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