जींद। जनस्वास्थ्य विभाग के विभिन्न योजनाओं के तहत गांवों में चल रहे कार्यो के बिलों का कई माह से भुगतान नहीं होने के चलते ठेकेदारों ने जनस्वास्थ्य विभाग के विकास कार्य रोक दिए। जल जीवन मिशन योजना के तहत जिले के करीब 300 गांवों में काम चल रहे थे। ठेकेदारों का कहना है कि उनकी 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के बिलों की अदायगी विभाग ने नहीं की है। वहीं जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने पर भी उन पर मार पड़ी है।
इसको लेकर वीरवार को जनस्वास्थ्य विभाग जींद सर्कल के नरवाना, जींद, उचाना, सफीदों के ठेकेदार कार्यालय के सामने मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। जिसमें ठेकेदार भारत भूषण के नेतृत्व में हुई बैठक में समय पर पेमेंट न होना, बिल पास न होना और जीएसटी दरों में बढ़ोतरी पर चर्चा की गई। भारत भूषण ने बताया कि विभाग द्वारा जनवरी से ठेकेदारों के बिलों का भुगतान करने में देरी की जा रही है। मार्च के बाद के तो अधिकतर बिल अटके हुए हैं। इस बारे में कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन बजट नहीं होने की बात कह दी जाती है। एक तरफ निर्माण व अन्य सामग्री के रेट डेढ़ गुणा हो चुके हैं। जिससे लागत भी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग बिलों की पेमेंट नहीं कर सकता। ऐसे में वह काम जारी नहीं रख सकते। इसलिए ठेकेदारों ने फैसला लिया है कि जब तक पहले हुए कामों के बिलों का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक काम बंद रखा जाएगा। वहीं सरकार की तरफ से कार्यों के टेंडर पर जीएसटी भी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। यह पुराने कामों पर भी लागू है। अगर किसी के पास दो लाख रुपये का टेंडर है, तो उसे 24 हजार रुपये की जगह अब 36 हजार रुपये जीएसटी देना होगा। जोकि गलत है। इसके विरोध में अब ठेेकेदार रविवार को चंडीगढ़ में बैठक करेंगे, जिसमें जींद के अलावा दूसरे जिलों के ठेकेदार भी शामिल होंगे। उस बैठक में आगे की रणनीति बनाकर फैसला लिया जाएगा।
मै चंडीगढ़ गया हूं। ठेकेदारों के बिलों के भुगतान के बारे में जानकारी नहीं है। इसको लेकर संबंधित एक्सईएन से बात कर पूरे मामले की जानकारी लेकर इसमें आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-एमएस राणा, एसई, जन स्वास्थ्य विभाग।