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अमृत महोत्सव: नमन, नारी शक्ति! चरम पर देशभक्ति, दिन-रात लगकर तैयार किए 50 हजार तिरंगे

Fri, 05 Aug 2022 12:27 AM IST
भूपेंद्र सिंह सतीश जागलान, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)

सार

संजीवनी महिला कलस्टर फेडरेशन की महिलाएं दिन-रात लगकर तिरंगा बनाने में जुटी हैं। सदस्याएं अभी तक 50 हजार तिरंगे तैयार कर चुकी हैं। ये सरकारी विभाग को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। यहां तीन साइज के तिरंगे बनाए हैं।
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तिरंगा बनाने में लगी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह संजीवनी महिला कलस्टर फेडरेशन की महिलाएं दिन-रात लगी हुई हैं। अभी तक यह महिलाएं 50 हजार तिरंगे तैयार कर चुकी हैं। इनको अभी कम से कम 50 हजार तिरंगे और तैयार करने हैं। इन महिलाओं के पास एक लाख तिरंगे बनाने का ऑर्डर है। यदि और ऑर्डर आया तो और भी तिरंगें तैयार किए जाएंगे।
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संजीवनी महिला कलस्टर फेडरेशन नामक स्वयं सहायता समूह की प्रधान रेखा अमरहेड़ी ने बताया कि प्रशासन की तरफ से उन्हें एक लाख तिरंगे बनाने का ऑर्डर मिला है। वह खुद दिल्ली से कपड़ा लाकर यहां पर सिलाई करती हैं। उनके पास मुकेश बोहतवाला, सीमा अशरफगढ़, अंजू राजपुरा तथा संतोष कंडेला दिन-रात सिलाई का काम कर रही हैं। उनके पास तीन साइज के तिरंगें हैं।

अभी तक उनके पास 20 गुणा 30 इंच के साइज का तिरंगा बनाने का ऑर्डर आया है। इसके अलावा वह 36 गुणा 54 व 48 गुणा 72 इंच के तिरंगें भी तैयार करेंगी। 20 गुणा 30 साइज के तिरंगा को वह 20 रुपये में बेच रहे हैं जबकि डंडे समेत यह 25 रुपये में बेचा जा रहा है।
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वहीं 36 गुणा 54 का तिरंगा 64 रुपये का, 48 गुणा 72 इंच का तिरंगा 148 रुपये का बेचा जा रहा है। उनका स्वयं सहायता समूह चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में दो हजार झंडों का ऑर्डर पूरा कर चुका है जबकि दो हजार झंडे और विवि को देने हैं। जब सरकार की तरफ से हर घर तिरंगा अभियान चलाने के निर्देश मिले थे तो जिला प्रशासन ने उनको बुलाकर तिरंगा बनाने के निर्देश दिए थे।

इसके अलावा हर सरकारी संस्था को इन तिरंगों के पैसे खुद देने हैं। कुछ सरकारी संस्थाओं ने उनको अलग से सीधे ऑर्डर दिए हैं, जबकि डीसी की तरफ से उन्हें अलग से ऑर्डर मिले हैं। प्रतिदिन वह लगभग 10 हजार झंडे तैयार कर रहे हैं। 

दिन-रात जुटी हैं काम में, महसूस नहीं होती थकान
रेखा अमरहेड़ी ने बताया कि एक तो तिरंगा बनाने में उन्हें स्वरोजगार उपलब्ध हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ तिरंगा बनाते समय उनमें देशभक्ति का जज्बा पैदा हो रहा है। इसलिए वह दिन-रात काम करते हुए भी थकान महसूस नहीं करती। अब तिरंगा बनाने में ही लगी रहती हैं।
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