जींद। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) में वीरवार को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन वीरवार को किया गया। इसमें महिला किसानों को गोमूत्र व गाय के गोबर से जीवाणु खाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
शिविर में गाय के गोबर व गोमूत्र की मदद से जीवाणु खाद, नीम, आक, धतूरा से जैविक कीटनाशक बनाना सिखाया गया। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि इस प्रशिक्षण में महिला किसानों को प्राकृतिक खेती करने के तरीके, प्राकृतिक तरीके से पैदा किए अनाज और फलों का मूल्य संवर्धन करने, किसानों का समूह बनाकर प्राकृतिक खेती का पंजीकरण करवाना सिखाया गया। देसी गाय के गोबर व गोमूत्र की मदद से रसायन मुक्त जीवाणु खाद बनाना भी महिला किसानों को सिखाया गया।
डॉ. सुभाष ने बताया कि गाय के एक ग्राम गोबर में 300 से 400 करोड़ जीवाणु होते हैं जो खेती के लिए लाभकारी होते हैं। 10 किलोग्राम गाय के गोबर में 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़ व 2 किलो बेसन और पेड़ के नीचे की 500 ग्राम मिट्टी से जीवामृत तैयार किया जाता है। इसके लगातार भूमि में प्रयोग से जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है जो पौधों को आवश्यक तत्व उपलब्ध करवाते हैं। इसके प्रयोग से यूरिया या डीएपी खाद की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे किसान का खर्चा बच जाता है। महिला किसान नीलम देवी ने बताया कि वह अपने खेतों में पिछले 6 वर्षों से कोई रासायनिक खाद प्रयोग नहीं करते। केवल जीवामृत व घनजीवामृत के प्रयोग से बढिया फसल ले रहे हैं।