दिल्ली-पटियाला हाईवे पर सुबह लगभग पांच बजे एक निजी बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराकर पलट गई। इसमें दो श्रमिकों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 15 अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि फिर भी गनीमत रही कि एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। क्योंकि बस श्रमिकों से खचाखच भरी थी। बस में 74 प्रवासी मजदूर सवार थे। अब सवाल यह उठता है कि बिहार से इन श्रमिकों को पंजाब ले जाया जा रहा था। कोरोना महामारी के दौरान भी कहीं पर बस की जांच नहीं हुई। इस प्रकार हरियाणा राज्य को प्रवेश करके पंजाब बार्डर तक पहुंची बस, प्रशासन पर भी एक सवालिया निशान पैदा करती है। जहां एक ओर कोरोना महामारी में बस व अन्य वाहनों में 50 प्रतिशत लोग बैठाने की हिदायत है, वहीं पंजाब की इस निजी बस में 74 श्रमिकों को भरकर ले जाया जा रहा था। इस प्रकार के मामले हर धान बिजाई के सीजन में देखने को मिलते हैं क्योंकि पंजाब व हरियाणा में मजदूरों की कमी होने के कारण धान लगवाने के लिए बिहार से मजदूरों को लाया जाता है और वाहनों में खचाखच भरा जाता है। मजदूर अपनी आजीविका के चक्कर में हर हालात से समझौता कर लेते हैं, लेकिन इस प्रकार मजदूरों को ठूंस-ठूंस कर एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाना प्रशासन की व्यवस्था पर सवालिया निशान छोड़ जाता है।
आजीविका के चक्कर में गवाई जान
अपने परिवार का पेट भरने के लिए मजदूर एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं ताकि अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। इसी तरह बिहार निवासी मजदूर गिदराही जिला सुपौल निवासी सुरेश मंडल (45) और गांव कटिया जिला सुपौल (बिहार) निवासी गणेशी सिंह (56) भी अपनी आजीविका के चक्कर में बिहार से पंजाब जा रहे थे, लेकिन उनको क्या पता था की जिस आजीविका के लिए पंजाब जा रहे हैं, वही काल का ग्रास बन जाएगी।
नींद से जागे तो देखा भयानक मंजर
पूरी रात के सफर के दौरान सभी मजदूर सो रहे थे, लेकिन ज्यों ही सुबह हुई तो बस नरवाना शहर को पार करके पंजाब बार्डर के नजदीक जा रही थी। मजदूरों को क्या पता था की नींद से जागते ही भयानक मंजर सामने होगा और देखते ही देखते बस में सवार मजदूरों में चीख पुकार मच गई। चालक जो पूरी रात बस को चला रहा था उसके एक नींद के झटके ने दो मजदूरों को मौत के आगोश में ले लिया। मजदूरों ने बताया कि वे तो आराम से सोए हुए थे। अचानक बस में जोरदार धमाका हुआ और बस साइड में पलट गई।
अस्पताल में मचा हड़कंप
सुबह-सुबह अचानक दो दर्जन के करीब घायल नागरिक अस्पताल में पहुंचे तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में डॉक्टर ने अन्य कर्मचारियों के सहयोग से घायलों को पट्टी की, लेकिन उस समय तक दो मरीज दम तोड़ चुके थे। डॉक्टर लगातार अपने काम पर लगे रहे और जो गंभीर रूप से घायल थे, उनको रेफर कर दिया गया बाकि घायलों का उपचार किया गया।
सफीदों में एक महीना पहले ऐसा ही हादसा हुआ था
सफीदों में भी एक महीना पहले एक निजी बस की बाइक से टक्कर हो गई। वह बस जींद से प्रवासी मजदूरों को लेकर बिहार के लिए चली थी। इस बस में भी 80 से ज्यादा प्रवासी मजदूर सवार थे। रास्ते मेें सफीदों में उसकी एक बाइक सवार के साथ दुर्घटना हो गई थी। यह दुर्घटना भी नींद के कारण ही हुई थी।
मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने मृतक सुरेश मंडल के भाई दिनेश के बयान पर बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। चालक से पूछा जाएगा कि वह इतने यात्रियों को कैसे बिहार से लेकर यहां तक पहुंचा। लॉकडाउन के दौरान सीमित यात्रियों को ही बसों में बैठ कर यात्रा करने की अनुमति है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डीएसपी साधुराम।