चार माह पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सहायक को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ेे जाने के बाद मामले की जांच के लिए डीईओ ऑफिस के कर्मचारी बृहस्पतिवार को करनाल विजिलेंस के समक्ष पेश होंगे। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी विजिलेंस के समक्ष रखे जाएंगे। गौरतलब है कि दो फरवरी को करनाल विजिलेंस टीम द्वारा सहायक को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। निजी स्कूल को मान्यता देने के नाम पर ली गई रिश्वत के मामले में तत्कालीन डीईओ जोगेंद्र सिंह हुड्डा भी जेल जा चुके हैं। इसी मामले में अब विजिलेंस डीईओ ऑफिस के कर्मचारियों पूछताछ करेगी।
लॉग बुक से उठ रहे सवाल
डीईओ ऑफिस के सूत्रों के अनुसार जोगेंद्र हुड्डा ने डीईओ रहते करीब पांच दर्जन स्कूलों को मान्य दी, लेकिन ऑफिस की लॉग बुक में डीईओ ऑफिस की गाड़ी की विजिट इन स्कूलों के नाम से नहीं चढ़ी है। ऐसे में सवाल उठते हैं कि डीईओ की गाड़ी यदि इन स्कूलों में गई ही नहीं तो स्कूलों को मान्यता कैसे मिल गई।
नियमों को ताक पर रखकर दी मान्यता
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील आशीष कुमार ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूलों को मान्यता देने के लिए नियम ताक पर रखने का मामला उजागर किया है। एडवोकेट आशीष के अनुसार डीईओ ऑफिस से मांगी गई जानकारी के अनुसार धड़ौली गांव स्थित एक निजी स्कूल को आठवीं से बढ़ाकर 12वीं तक की मान्यता दी गई। यह मान्यता नियमानुसार निदेशक सेकेंडरी शिक्षा द्वारा दी जानी चाहिए, लेकिन यह डीईओ ऑफिस की ओर से जी जारी की गई है।
नियमित जांच के तहत ही जींद डीईओ ऑफिस के कर्मचारी बृहस्पतिवार को करनाल आएंगे। रिश्वत के आरोपों में विजिलेंस द्वारा तत्कालीन डीईओ जोगेंद्र सिंह हुड्डा की जांच चल रही है। उनसे संबंधित कुछ जानकारी ही प्राप्त करनी है।
- राजपाल, करनाल विजिलेंस निरीक्षक।