तेलंगाना में पशु चिकित्सक के हत्यारों की शुक्रवार सुबह पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत पर पशु पॉली क्लीनिक में परिचर्चा के दौरान पशु चिकित्सक डॉ. कुलनिधि, डॉ. पिंकी नेहरा, डॉ. पुनीत, डॉ. रीमा वर्मा, डॉ. बलवंत, डॉ. सलोचना, डॉ. राजू, डॉ. रूबी व डॉ. रविंद्र हुड्डा ने कहा कि हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ हुई दरिंदगी से चिकित्सक उबर नहीं पाए थे। सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने की मांग की जा रही थी। शुक्रवार को चारों आरोपियों के एनकाउंटर से चिकित्सकों को आत्म सम्मान की अनुभूति हुई है। इससे अन्य आरोपियों को भी सबब मिलेगा। इसके लिए पशु चिकित्सक पुलिस कर्मियों के भी धन्यवादी हैं, जिन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तुरंत पकड़ लिया। जब आरोपियों ने भागने की कोशिश की तो उन्हें सही सजा दी गई है।
हर महिला सम्मान और सुरक्षा की हकदार
हर महिला सम्मान की हकदार होती है। जब समाज में हर महिला को सम्मान की दृष्टि से देखा जाएगा तो वह समाज में हर तरीके से सुरक्षित है। जब हर व्यक्ति महिलाओं का सम्मान करेगा तो दुष्कर्म की घटनाओं पर अपने आप रोक लग जाएगी। दूसरों की बहन-बेटियों को भी अपनी बहन व बेटी के समान इज्जत देनी चाहिए, तभी एक आरोप मुक्त समाज का निर्माण होगा। इसलिए आरोपी दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने से पहले दूसरों की बहन बेटियों में अपनी बहन व बेटी की कल्पना अवश्य करें। इससे उसे महसूस होगा कि अगर यह घटना उसकी बहन या बेटी के साथ हो तो उसे कैसा महसूस होगा।
डॉ. कुलनिधि
आरोपियों के लिए होना चाहिए जल्द सजा दिलवाने का प्रावधान
दुष्कर्म का आरोपी हमेशा आरोपी ही रहता है, चाहे वह नाबालिग हो, नौजवान हो या फिर बुजुर्ग। उसे कठोर से कठोर और जल्द सजा मिलनी चाहिए। इससे पीड़ित महिलाओं को जल्द न्याय मिल पाएगा। जब एक दुष्कर्म आरोपी पीड़ित की उम्र को नहीं देखता कि वह नाबालिग है, युवती है या फिर बुजुर्ग, तो फिर आरोपियों को भी सजा देते समय उसकी उम्र का लिहाज नहीं करना चाहिए। आज छह साल से लेकर 80 साल तक की महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। ऐसे में हमारे संविधान में ऐसे कानून पारित होने चाहिए, जिससे आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। जब किसी व्यक्ति पर आरोप सिद्ध हो जाता है तो उसे पुलिस सुरक्षा नहीं बल्कि दंड देना चाहिए।
डॉ. पिंकी।
पिता का मान होती हैं बेटियां
बेटियां पिता का मान होती हैं। वह दो कुलों को जोड़ती हैं। एक महिला के बिना वंश की शुरूआत नहीं होती। महिलाओं ने हर क्षेत्र में बेटों से अच्छा प्रदर्शन किया है। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल का मैदान, महिलाओं ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। पशु चिकित्सक के दुष्कर्म के आरोपियों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए थी।
आरती।
विदेशों के नियम भारत में हो लागू
आरोपियों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए। इससे भयभीत होकर वह दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने से पहले दस बार सोचेगा। विदेशों में भी दुष्कर्म के आरोपियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। वह नियम भारत में भी लागू होने चाहिए। जब विदेशी पहनावे को अपनाया जा सकता है तो विदेशों के नियमों को भी अपनाना चाहिए, जिससे समाज में सुधार हो सके।
रविंद्र कौर।
आरोपी को जेल की जगह हो फांसी
अपने देश में हजारों दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले पेंडिंग पड़े हैं। ऐसे में इन मामलों में भी जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए, जिससे पीड़ित को न्याय मिल सके। ऐसे मामलों में आरोपी को जेल की सजा नहीं बल्कि फांसी की सजा होनी चाहिए। इसके बाद ही महिलाओं को सही रूप में न्याय मिल पाएगा। तभी एक भय मुक्त समाज की स्थापना देश में हो पाएगी।
रमनजीत कौर।
आरोपियों को एक बार अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए था
आरोपियों को दुष्कर्म की घटना को अंजाम देनेे से पहले एक बार अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए था। मां-बाप अपने बेटे को यह सोचकर अच्छी शिक्षा व रहन-सहन प्रदान करते हैं कि वह आगे चलकर अच्छा इंसान बनेगा और समाज में अपना एक अलग नाम बनाएगा। आरोपियों को सजा तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें एक बार अपने माता-पिता के बारे में सोचना चाहिए था कि जब उन्हें इस वारदात का पता लगेगा तो उन पर क्या गुजरेगी।
नीलम।
बुरे कर्मों का अंजाम हमेशा बुरा होता है
बुरे कर्मों का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है। आरोपी यह सोचकर जुर्म करता है कि वह बच जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता। आरोपी को सजा मिलती ही है। यह सभी के लिए एक सीख है। देर सवेर न्याय अवश्य होता है, लेकिन पशु चिकित्सक के साथ हुई वारदात में समाज का हर वर्ग जल्द न्याय चाहता था। आरोपियों को मिली यह सजा पशु चिकित्सक को श्रद्धांजलि है।
मीनू।