विकास पर मंथन के लिए आयोजित जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम विवाद का विषय का बन गया। जींद में शनिवार को विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के भाषण के बीच अपनी बात रखने पर एक सरपंच को पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। इस पर वहां मौजूद जनप्रतिनिधि विरोध जताते हुए कार्यक्रम छोड़कर निकल गए। वहीं सोनीपत के मुरथल में पंच और सरपंचों ने ई-टेंडरिंग का विरोध जताते हुए मंत्री के समक्ष नारेबाजी की।
जींद-सफीदों रोड स्थित श्याम गार्डन में जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम में अलेवा के सरपंच विनोद ने मंत्री को अपनी तरफ से कुछ मांगों को लेकर भाषण के बीच में ही रोकना चाहा। इस पर पुलिसकर्मियों ने सरपंच को रोका। पुलिसकर्मियों के रोकने पर भी वे नहीं माने तो मंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसको बाहर निकालो, इस तरह के सरपंच हर कार्यक्रम में मिलते हैं।
जिसके बाद वहां मौजूद अन्य सरपंच भड़क गए और कार्यक्रम से बाहर निकलकर मंत्री के खिलाफ आधा घंटे तक नारेबाजी शुरू कर दी। मंत्री ने इसके बाद कार्यक्रम में कहा कि वे आजाद हिंद फौज के परिवार से संबंध रखते हैं। इस तरह के लोगों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि सरपंची की आड़ में ठेकेदारी करने वालों पर उनका ध्यान रहेगा।
सरपंच बोले- मांगें उठा रहे थे, मंत्री ने अपमान किया
विरोध जता रहे सरपंचों ने कहा कि वे मंत्री के समक्ष गांव में विकास कार्य करवाने के लिए दो लाख के बजाय 50 लाख रुपये की सीमा करने, सरपंचों का वेतनमान 25 हजार रुपये करने और सरकारी रैली व जलसों में लोगों के ले जाने के लिए उन पर दबाव न बनाने की मांग उठाना चाहते थे। मंत्री ने उनका अपमान किया है। वे उनसे सामूहिक तौर पर माफी मांगें, अन्यथा वर्ष 2024 के चुनाव में वे इस अपमान का बदला लेंगे।
सरपंच गांव का जनप्रतिनिधि है, कोई ठेकेदार या अकाउंटेंट नहीं
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल (सोनीपत) में आयोजित कार्यक्रम में सरपंचों ने ई-टेंडरिंग का विरोध जताते हुए मंत्री से कहा कि अगर उन्हें विकास कार्यों के लिए पैसा सीधे नहीं दिया जा सकता तो ठेकेदार और अधिकारी अपनी मनमर्जी से गांव में कार्य करवाएंगे। दुभेटा के सरपंच विकास आर्य और महमूदपुर के सरपंच सतपाल मान ने एक सुर में कहा कि हम तो केवल अब गांव के चौकीदार बनकर ही रह जाएंगे।
महज दो लाख रुपये से ज्यादा के विकास कार्य हम नहीं करा पाएंगे। मंत्री को मांगों से अवगत कराया, लेकिन सरपंचों की बात नहीं सुनी। वहीं बबली ने कहा कि सरकार शहरों की तर्ज पर गांवों का भी विकास करवाएगी। सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। पिछली सरकारों में जो सरपंच घोटाले करते थे, उन पर सरकार ने कार्रवाई करते हुए रिकवरी की है। अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा है। सरपंच गांव का जनप्रतिनिधि है, कोई ठेकेदार या अकाउंटेंट नहीं है।