सफीदों। गांव मुआना के दो युवक थाईलैंड से किसी तरह से जान बचाकर सकुशल अपने घर पर लौटे हैं। वह बड़े सपने लेकर गए थे कि वह विदेश जाकर अच्छा पैसा कमाकर परिवार को आगे बढ़ाएंगे, लेकिन वहां जाकर उन्हें विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा।
उन्होंने किसी तरह से थाईलैंड के भारतीय दूतावास से संपर्क किया और दूतावास के सहयोग से वे किसी तरह से कंपनी के जाल से निकलकर डिपोर्ट होकर भारत लौटे। अपने घर गांव मुआना पहुंचे दोनों युवकों में अश्वनी 20 अगस्त 2024 को और कपिल सात जुलाई 2024 को थाईलैंड गए थे।
अश्वनी और कपिल ने बताया कि वह डीडीएल कंपनी थाईलैंड में नौकरी करने के लिए गए थे। उनका संपर्क टेलीग्राम के माध्यम से मलेशिया निवासी रंजीत कुमार से हुआ था। रंजित ने उन्हे झांसा दिया कि वह यहां पर आ जाएं और उनको कंपनी में बढिया काम दिलवाया जाएगा।
वह रंजित के झांसे में आकर थाईलैंड पहुंच गए, जहां से उनको एजेंट म्यांमार ले गया और वहां की डीडीएल नामक कंपनी में नौकरी दिलवाई गई। उसके बाद उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। उनको कहा गया कि कंपनी में उनको डाटा एंट्री ऑपरेटर का काम करना होगा और उन्हें ट्रेनिंग देनी शुरू की गई।
इस दौरान उनको पता चला कि यहां पर गैर कानूनी तरीके से लोगों के साथ ठगी का कार्य किया जाता है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह काम समझ में नहीं आया। उसके बाद उनको चैटिंग ऑपरेटर लगाया गया।
इस चैटिंग में लोगों को लिंक भेजकर उन्हें परचेज करने के लिए फंंसाया जाता था। लोगों के पैसे तो कंपनी के पास आ जाते थे, लेकिन उन्हें सामान उपलब्ध नहीं करवाया जाता था। उसके बाद वह सारा माजरा समझ गए और उन्होंने काम करने से मना कर दिया तो उनकी सैलरी रोक ली गई और उन पर जुर्माना लगाया जाने लगा।