22जेएनडी01 : जींद जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्र। सोशल मीडिया
जींद। जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्र से 76 लोग चुनाव मैदान में हैं। सभी अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से कुछ लोग व्यवसाय के साथ राजनीति करते हैं, तो कुछ निजी स्कूल चलाने वाले भी चुनाव मैदान में हैं। खेल और नौकरी को छोड़कर भी लोग राजनीति में भाग्य आजमा रहे हैं। सभी को उम्मीद है कि चुनाव में उनकी जीत होगी। अब यह तो 8 अक्तूबर को ही पता चलेगा कि कौन कितने पानी में हैं। फिलहाल जनता के हाथों में इन नेताओं की किस्मत की बागडोर है।
सफीदों से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले निवर्तमान विधायक सुभाष गांगोली, जुलाना से जजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले निवर्तमान विधायक अमरजीत ढांडा तथा सफीदों विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले जसबीर देशवाल हैचरी चलाते हैं। पूरे एशिया में इनका काफी नाम है। इन सभी की अपनी-अपनी हैचरी हैं, जहां यह चूजे व अंडे तैयार किए जाते हैं। जुलाना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली विनेश फोगाट वैसे तो खिलाड़ी हैं, लेकिन वह रेलवे में भी नौकरी करती थीं। इसी प्रकार भाजपा प्रत्याशी कैप्टन योगेश बैरागी भी एयर इंडिया में पायलट थे। इनेलो प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र लाठर जीएसटी में डिप्टी कमिश्नर रह चुके हैं। जींद से जजपा प्रत्याशी धर्मपाल प्रजापत इंजीनियर थे। चारों ने नौकरी छोड़कर अब राजनीति में किस्मत आजमाई है। जींद से भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्णलाल मिड्ढा पेशे से चिकित्सक हैं, लेकिन 15 साल से राजनीति में हैं।
स्कूल प्रबंधक भी चुनाव मैदान में
जींद विधानसभा क्षेत्र से इनेलो प्रत्याशी नरेंद्रनाथ शर्मा निजी स्कूल चलाते हैं। वह अब पहली बार राजनीति में चुनाव लड़ रहे हैं। अभी तक वह केवल स्कूल ही संभालते थे, लेकिन इनेलो के भी कार्यकर्ता थे। इसी प्रकार आम आदमी पार्टी प्रत्याशी वजीर ढांडा भी निजी स्कूल चलाते हैं। वजीर ढांडा गांव अहीरका में अपना स्कूल चलाते हैं तथा काफी समय से आम आदमी पार्टी में सक्रिय हैं।
राजनीतिक विरासत बढ़ा रहे आगे
उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र से जजपा प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला तथा कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह राजनीतिक परिवारों से आते हैं। इनके परिवारों ने हमेशा राजनीति ही की है। बृजेंद्र सिंह आईएएस थे। 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने सेवानिवृत्ति ले ली थी। दुष्यंत चौटाला पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल के परिवार से हैं और अब अपनी राजनीतिक विरासत आगे बढ़ा रहे हैं।