पिल्लूखेड़ा। उपेंद्र मुनि महाराज का पिल्लूखेड़ा की नगरी में प्रवेश हुआ। उन्होंने कहा कि प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य शक्ति का संचार करना होता है। आलोम-विलोम, कपाल भारती करने से शरीर स्वस्थ रहता है। उन्होंने सुखासन व मुद्रासन के बारे में भी बताया और करके सिखाया।
मुनि ने कहा कि अपने तन और मन को शुद्ध और पवित्र रखना चाहिए। गंदी भावना बार-बार गंगा स्नान करने पर भी शुद्ध नहीं होती। दान धन को और योग जीवन को पवित्र व शुद्ध करते हैं। स्कंद पुराण में कहा गया है कि मानसिक मल को धोने से मन शुद्ध होता है। संयम साधना से मनुष्य पवित्र होता है।
उपेंद्र मुनि ने कहा कि इंसान अपने अंदर की कमियों को नहीं देख रहा। जिस प्रकार एक अच्छे खासे मकान को पानी रिस-रिस कर खराब कर देता है, उसी प्रकार बुराइयों और घमंड के कारण ही इंसान का पतन होता है। अपने अंदर छिपे गुणों को पहचानो। इस चोले को संभाल कर रखें और अपने अंदर छिपे अवगुणों को बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए। संतों की वाणी को सुनकर उस पर अमल करना चाहिए।