27जेएनडी27 : कृष्ण-रुक्मिणि विवाह प्रसंग सुनते श्रद्धालु। स्रोत : पुजारी
जींद। जयंती देवी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा वाचक पंडित गिरधारी लाल ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण किया। भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
पंडित गिरधारी लाल ने कहा कि रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानती थीं और मन ही मन उन्हें पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। जब रुक्मिणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल से करने का निर्णय लिया तो उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उन्हें अपने हृदय की बात बताई।
रुक्मिणी की भक्ति और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें विदर्भ से हरकर द्वारका ले गए और विधि-विधान से विवाह किया। कथा वाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह भक्त और भगवान के अटूट संबंध का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा, प्रेम और समर्पण रखने का आह्वान किया। कथा के दौरान भजनों और जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लेने के साथ भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग की झांकी के दर्शन भी किए। आयोजकों ने बताया कि कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक लाभ ले रहे हैं। इस अवसर पर राकेश गोयल, संजय कुमार ठेकेदार, विनोद गुप्ता, नरेंद्र कौशिक बाता, ओमप्रकाश, विशाल कामरा, राजेश खरब, सोमबीर मालिक, राधे श्याम मौजूद रहे।