संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के आह्वान पर चिकित्सकों की हड़ताल का बुधवार को मरीजों पर ज्यादा असर पड़ा। दिव्यांग जांच शिविर पूरी तरह से ठप्प रहा। इस कारण 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय कर आए दिव्यांगों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा।
स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के नाम से पर्ची तो काटी गई लेकिन उपचार नहीं मिला। ऐसे में नागरिक अस्पताल में मरीज उपचार केे लिए भटकते रहे।
स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार चिकित्सकों की व्यवस्था इमरजेंसी में की गई है लेकिन वो बेहतर उपचार देने में असमर्थ दिखे। इमरजेंसी में प्रशिक्षु बच्चे टीके लगा रहे हैं। ऐसे में आमजन ने अब अस्पतालों की तरफ रुख कम कर दिया है। इसके कारण हड़ताल के तीसरे दिन नागरिक अस्पताल में 1167 ही ओपीडी हो पाई।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तब तक उनकी हडताल जारी रहेगी। नागरिक अस्पताल में बुधवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम से पर्ची काटी गई तो उन्होंने एतराज जताया। कहा कि जब वे हड़ताल पर हैं तो उनके नाम से पोर्टल पर पर्ची क्यों काटी जा रही है।
वहीं, गर्भवतियों व सामान्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। अस्पताल में सर्जन विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएं पूर्ण बंद हैं। वहीं ऑपरेशन भी नहीं हुए। गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बाहर से 800 रुपये खर्च पड़ रहे हैं।
हड़ताल के चलते लोग परेशान
चिकित्सकों की हडताल का असर प्रशासनिक कार्यों पर तो पड़ ही रहा है, साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र लेने में भी लोगों को परेशानी आ रही है। हड़ताल के कारण नागरिक अस्पताल में सुबह से ही मरीज उपचार के लिए पहुंंच जाते हैं। कमरों के बाहर बैठे कर्मियों द्वारा चिकित्सकों के हड़ताल पर होने की बात कही जाती है। तीन दिनों में ओपीडी की संख्या भी लगातार कम हो रही है। आठ दिसंबर 1320, 9 दिसंबर को 1062, 10 दिसंबर को 1167 मरीजों की ओपीडी हुई।
बेटे को दिव्यांग जांच शिविर में लेकर आया था लेकिन यहां पर चिकित्सक ही नहीं हैं। अब वह 50 किलोमीटर सच्च्चाखेड़ा गांव वापस जाने को मजबूर हैं।
-जयवीर सच्चाखेड़ा।
वह दिव्यांगता की जांच करवाने के लिए आए थे। उनको नहीं पता था कि हड़ताल के कारण शिविर नहीं लगेगा। अब वह वापस जाने को मजबूर है। डाहोला गांव से मुश्किल से वह जींद पहुंचे थे।
-अमन दनौदा
आमरण हड़ताल भी शुरू
मांगों को लेकर स्वास्थ्य मुख्यालय पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के चार सदस्यों ने आमरण हड़ताल भी शुरू कर दी है। चिकित्सकों की मांगों में एसएमओ भर्ती में सुधार और एसीपी शामिल है। जिसे सरकार द्वारा मान भी लिया गया है लेकिन मानी गई मांगों को ही लागू नहीं किया जा रहा है।
एसएमओ की सीधी भर्ती पर रोक लगाई जाए : डाॅ. बिजेंद्र ढांडा
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के जिला प्रधान एवं प्रदेश संयोजक डाॅ. बिजेंद्र ढांडा ने कहा कि हड़ताल पर जाने से पहले सरकार को सभी परिस्थितियों से अवगत करवा दिया गया था। जनभावनाओं को समझने की बजाए सरकार हठधर्मिता को अपना रही है। इसका खामियाजा चिकित्सकों के साथ-साथ आमजन को भुगतना पड़ रहा है। पिछले वर्ष सरकार ने वादा किया था कि डायरेक्ट एसएमओ की भर्ती बंद की जाएगी और सभी एसएमओ पद प्रमोशन से ही भरे जाएंगे। सर्विस रूल्स में संशोधन के लिए सहमति भी बनी थी लेकिन अभी तक न नियम बदले गए और न ही भर्ती प्रक्रिया में कोई सुधार हुआ। उन्होंने मांग की कि एसएमओ की सीधी भर्ती पर रोक लगाई जाए। स्पेशलिस्ट को कंपनसेशन दिया जाए।
वर्जन
अलग-अलग ओपीडी में सभी मरीजों का उपचार पहले की तरह ही किया जा रहा है। बीपीएस खानपुर, आयुष, एनएचएम, ईएसआई के तहत चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई हैं। पोस्टमार्टम के लिए अलग से ड्यूटी लगाई गई है। उपचार को लेकर आमजन को किसी तरह की परेशानी नही आने दी जा रही है।
- डाॅ. सुमन कोहली सीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
10जेएनडी14: जयवीर सिंह।
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