16जेएनडी46: दीपावली पर आटडिया खरीदते हुए ग्राहक। संवाद।
नरवाना। दीपावली पर शहर के कैनाल रोड स्थित दुकानों पर कुछ अलग नजारा देखने को मिल रहा है। पहले जहां कागज और मिट्टी से बनी आटडियां ही बाजारों में दिखाई देती थीं वहीं इस बार लकड़ी से बनी और आधुनिक डिजाइन वाली आटडियां ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रही हैं।
कैनाल रोड पर दुकान लगाने वाले दुकानदार कुलदीप सिंगला ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले ही अपनी स्टॉल शुरू की है और अब तक करीब 15 लकड़ी की आटडियां बिक चुकी हैं। कुलदीप का कहना है कि लोग नई और सुंदर चीजों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विशेष कारीगरों से ये आटडियां तैयार करवाई गई हैं ताकि ग्राहकों को इस बार दीपावली पर कुछ नया और अनोखा देखने को मिले। कुलदीप ने बताया कि करीब दस साल पहले शहर में इस तरह की आटडियां दिखाई देती थी लेकिन समय के साथ यह परंपरा खत्म होती चली गई।
अब एक बार फिर लकड़ी की आटडियां लौट आई हैं। उन्होंने बताया कि ये आटडियां न केवल पूजा के लिए उपयोगी हैं, बल्कि घर की सुंदरता को भी बढ़ाती हैं। खास बात यह है कि इन आटडियों में कांच और रंग-बिरंगी लाइटों का प्रयोग कर इन्हें आकर्षक घर के आकार में तैयार किया गया है जो देखने में बेहद सुंदर लगती हैं।
दीपावली पर आटडियों की पूजा का महत्व
आटडी (या आटड़ी) घर के मंदिर का प्रतीक मानी जाती है। दीपावली पर इसे सजाने और पूजने की परंपरा इसलिए है क्योंकि यह मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के आगमन का स्वागत करती है। आटडी को घर में स्थापित करने का अर्थ है। घर में समृद्धि, शांति और शुभता का वास होना। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात आटडी में दीप जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है।