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घर जाने के लिए कभी कॉलेज तो कभी अपने निवास के चक्कर काट रहे श्रमिक

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बंटी कुमार। - फोटो : Jind
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कोरोना महामारी ने देश के हालात ऐसे कर दिए हैं कि लोग खुद को इस बीमारी से बचाने के लिए जहां तमाम नियमोें का पालन कर रहे हैं वहीं दूसरे राज्यों से आकर यहां पर रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों को काम नहीं नहीं मिल पा रहा है। इससे उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन की वजह से मजदूरों ने काम न होने से घर जाने शुरू कर दिया है। प्रशासन द्वारा भी उन्हें उनके घर भेजने की व्यवस्था की गई है। अब तक 3900 लोगों को जिले से उनके घर भेजा जा चुका है। कुछ प्रवासी अब भी फंसे हुए हैं। यह लोग जहां पर रहते हैं वहां से दिन में दो-तीन बार राजकीय कॉलेज के चक्कर काटते नजर आते हैं, क्योंकि मजदूरों को राजकीय कॉलेज से ही बसों में भेजा जाता है।
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कुछ मजदूरों ने अमर उजाला के साथ अपना दर्द सांझा किया। उन्होंने कहा कि उनके मजदूरी के पैसे भी नहीं मिले हैं। अब यह लोग यहां मजदूरी करने की बजाय अपने घर जाना बेहतर समझते हैं।
नहीं मिली मजदूरी, चार दिन से कर रहे इंतजार
मैं कैरखेड़ी गांव में मजदूरी करता था, मगर मुझे मेहनताना नहीं दिया गया। जेब में एक पैसा नहीं है। चार दिन से घर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई इंतजाम नहीं किया गया। मेहनताना के 16 हजार रुपये मिलने हैं। प्रशासन से अनुरोध है कि घर जाने से पहले मुझे मेरा मेहनताना दिलवाए, ताकि घर पहुंचने पर वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर सके।
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रणजीत कुमार, प्रवासी।
मजदूरों के साथ हो रहा अन्याय
मजदूरों के साथ बड़ा अन्याय हो रहा है। प्रवासियों को उनकी मजदूरी का पैसा नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। जब प्रशासन प्रवासियों को घर भेज रहा है तो ऐसे में उन्हें उनकी मजदूरी भी दिलवाए। इससे अपने घर जाकर थोड़ा गुजर-बसर कर सकें। लॉकडाउन के कारण सभी काम धंधे बंद पड़े हैं। ऐसे में इन पैसों से ही काम चलेगा।
रूपेश कुमार, प्रवासी।
मेहनत मजदूरी करके करते हैं पालन पोषण
बड़ी मेहनत करके दो वक्त की रोटी के लिए पैसे इकट्ठे कर पाता हूं। दिनभर काम करने के बाद ही पैसे मिलते हैं, जिससे शाम को खाने की व्यवस्था कर पाता हूं। लॉकडाउन की वजह से दो महीने से परेशानी हो रहा हूं। यहां से थोड़ा-थोड़ा पैसा इकट्ठा कर घर भेजता हूं ताकि अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा कर सकूं। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि जल्द हमें हमारी मजदूरी का पैसा मिले।
जलधर पासवान।
मेहनत का पैसा मिलना चाहिए
प्रवासियों को उनके हक का पैसा मिलना चाहिए। बिहार के लिए प्रवासी पिछले चार दिन से बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बस नहीं आ रही। बेशक प्रशासन द्वारा थोड़ी बहुत राहत प्रवासियों को उनके घर जाने के लिए दी जा रही है, मगर प्रशासन को चाहिए कि प्रवासियों के पैसे दिलाने में भी सहयोग करें।
बंटी कुमार, प्रवासी।
प्रशासन का होगा बड़ा आभार
अगर प्रशासन उनका पैसा दिलवा दे तो मैं जिला प्रशासन का बड़ा आभारी होऊंगा। प्रवासियों को अगर उनके पैसे मिल जाएंगे तो उन्हें अपने घर जाने में आसानी होगी। घर जाने के लिए कभी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने को कहते हैं तो कभी राजकीय कॉलेज में आने के लिए कहते हैं। दिनभर राजकीय कॉलेज के चक्कर काट-काटकर थक चुका हूं।
जिनका रजिस्ट्रेशन हुआ, उनको भेज रहे
जिन प्रवासियों ने अपने घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, उनको घर भेजा जा रहा है। एक-दो दिन छोड़कर प्रतिदिन बसें भेजी जा रही हैं। एक बस में 30 लोग बैठाए जा रहे हैं। जिन मजदूरों को उनकी मजदूरी नहीं मिली है, इसकी शिकायत वह प्रशासन से करें। उनकी मजदूरी दिलाई जाएगी।
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मनोज कुमार, तहसीलदार, जींद।

रूपेश कुमार।- फोटो : Jind

रणजीत कुमार।- फोटो : Jind

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