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देश को बदलना है तो पहले गांवों को बदलना होगा: अन्ना हजारे

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अगर देश को बदलना है तो पहले गांवों को बदलना पड़ेगा। पूरे देश में खेलों के नाम से प्रसिद्ध हरियाणा प्रदेश में नशा पैर पसार रहा है। नशे को खत्म करने के लिए युवाओं को जागृत होना पड़ेगा। इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ जाता है। उसका फर्ज बनता है कि वह देश और समाज के लिए कुछ करे। उक्त बात मंगलवार को बुढ़ाखेड़ा में 38 गांवों में खोले गए पुस्तकालयों का उद्घाटन करने के बाद अन्ना हजारे ने कही।
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उन्होंने कहा कि अध्यात्म के बिना भौतिक विकास नहीं हो सकता। गांव एक मंदिर है और वह एक मंदिर मेेें रहते हैं। वह एक प्लेट और एक बिस्तर रखते हैं। माला भी पहनते हैं, लेकिन जाप नहीं करते। लोग उनकी माला को देखकर शराब नहीं पीते, फिर भी लोग उन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि गांव बुढ़ाखेड़ा लाठर ने जो अनोखी पहल शुरू की है इससे पूरे देश में एक अच्छा संदेश जाएगा। देश के युवा समाजसेवा के लिए आगे आएंगे। हजारे ने कहा कि देश के विकास के लिए उन्होंने आंदोलन करते हुए सूचना का अधिकार कानून पास करवाया। इससे काफी हद तक भ्रष्टाचार पर लगाम भी लगी थी, लेकिन सरकार उसे भी संशोधन करने में जुटी हुई है। सरकार चाहे कोई भी हो, वह अपने हिसाब से कानून में संशोधन कर लेती है। इस अवसर पर पूर्व जस्टिस प्रीतम पाल, सामाजिक कार्यकर्ता कर्मवीर, एडिशनल जज जसबीर कुंडू व अन्य मौजूद थे।
पगड़ी पहना और छड़ी देकर किया सम्मानित
बुढ़ाखेड़ा लाठर पहुंचने पर अन्ना हजारे को पगड़ी पहनाई गई और बुढ़ापे का सहारा छड़ी देकर सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम में अन्ना हजारे पगड़ी को पहने रहे। अन्ना हजारे ने कहा कि इस गांव से अन्य गांव भी प्रेरणा लेकर देश और समाज हित में कार्य करें। उनके गांव रालेगांव सिद्धी ने भी 80 लाख रुपये की लागत से गांव में स्कूल का निर्माण किया है। गांव के विकास को देखने के लिए 13 साल में 12 लाख लोग आ चुके हैं।
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