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Jind News: अब तक जिले में 720 टीबी मरीजों को लिया गया गोद

Sat, 11 Nov 2023 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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10जेएनडी09: बागवानी विभाग के डीएचओ विजय पान्नू व सिविल सर्जन डॉ. गोपाल गोयल मरीजों को खाद्य साम
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जींद। जिले में टीबी के मरीजों के स्वास्थ्य के सुधार के लिए लगातार सरकारी विभाग आगे आ रहे हैं। जिसके चलते शुक्रवार को बागवानी विभाग ने दस मरीजों को छह माह के लिए गोद लिया। उनके स्वास्थ्य के सुधार के लिए गुड़, चने की दाल, भुगड़े, मूंग की दाल, सोयाबड़ी दी। कार्यक्रम का आयोजन सिविल सर्जन कार्यालय में सीएमओ डॉ. गोपाल गोयल की अध्यक्षता में किया गया। बागवानी विभाग से डीएचओ डॉ. विजय पान्नू व असीम जांगड़ा ने कहा कि टीबी के मरीजों की सहायता के लिए भविष्य में जो भी सहयोग की जरूरत होगी। वह लगातार इन मरीजों के स्वस्थ होने तक उपलब्ध करवाएंगे।
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कार्यक्रम में सिविल सर्जन गोपाल गोयल व डीटीओ डॉ. संदीप लोहान ने कहा कि जिले में 1600 से अधिक टीबी के मरीज हैं। इनमें अधिकतर की आर्थिक हालात कमजोर होने के कारण उनको खानपान में पौष्टिक आहार उपलब्ध नहीं होता। जिसके कारण उन पर दवाईयों का भी ज्यादा असर नहीं हो पाता। इन लोगों के स्वास्थ्य के सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों व सामाजिक संस्थाओं व एनजीओ से अपील की थी कि इनकी सहायता के लिए इन मरीजों को गोद लिया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने भी वर्ष 2025 तक प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन विभागों के अधिकारियों व संस्थाओं के सहयोग की जरूरत है। इसके लिए टीबी कोर्डिनेटर कोमल लगातार विभागों से संपर्क कर इन मरीजों को गोद दिलवाने के लिए प्रयासरत है। अब तक 720 मरीजों को गोद दिलवाया जा चुका है। विभाग का लक्ष्य है कि जिन मरीजों की दवाईयां चल रही हैं उन सभी को आगामी वर्ष तक स्वस्थ्य बनाया जा सके। जिले में बढ़ते टीबी के मरीजों को रोका जा सके।
छह माह में हुआ ज्यादा सुधार

टीबी के मरीजों का उपचार छह माह तक चलता है। जिसके चलते कुछ मरीजों को पहले ज्यादा समय तक दवाईयों का प्रयोग करना पड़ रहा था, लेकिन अब जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए विभाग, संस्थाएं व एनजीओ आगे आ रहे हैं। जिसके चलते सैंकड़ों टीबी के मरीजों को उचित खानपान मिलने के कारण उनके स्वास्थ्य में बेहतर सुधार दिखा है। अब उम्मीद है कि जिले से टीबी को वर्ष 2025 तक पूर्ण रूप से खत्म करने में सफलता हासिल होगी।
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-डॉ. गोपाल गोयल सिविल सर्जन जींद।
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