जींद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बुधवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मोनिका ने जेल लोक अदालत का आयोजन किया। इस अदालत में पांच मामले विचाराधीन रखे गए। उनमें से तीन मुकदमों को अंडरगोन किया गया। विचाराधीन बंदी पर और कोई मुकदमा न हो। तीन कैदियों को रिहा करने का आदेश पारित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मोनिका ने बताया कि जेल लोक अदालत महीने में दो बार लगाई जाती है। प्राधिकरण सचिव ने जिला जेल का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कैदियों हवालातियों को उनकी केसों में आ रही मुश्किलों को सुना और समस्या के समाधान संबंधी जानकारी दी। इसके अलावा सीजेएम ने जेल में बंद कैदियों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को अपने केस की पैरवी करने के लिए वकील की जरूरत है तो वह मुफ्त कानूनी सेवाएं के लिए प्राधिकरण के अधीन वकील की सेवाएं ले सकते हैं।
इस संबंध में लिखित दरखास्त जेल प्रशासन के माध्यम से या न्याय रक्षक के माध्यम से जिला, विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में भेजनी होती है। उन्होंने बताया कि नालसा हेल्पलाइन नम्बर 15100 पर किसी भी प्रकार की कोई भी जानकारी प्राप्त करते हैं।
कारगर सिद्ध हो रही राष्ट्रीय लोक अदालत
आपसी समझौते से हल होने वाले मामलों में राष्ट्रीय लोक अदालत काफी कारगर सिद्ध हो रही है। लोक अदालत में सस्ता और सुलभ न्याय मिलता है। इसकी प्रक्रिया बिल्कुल साधारण है, जिसमें दोनों पक्षों की सहमति से केस का निपटारा किया जाता है। इससे लोगों के धन और समय की बचत होती है। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक लोन से संबंधित मामले सड़क दुर्घटना क्लेम, एन माई एक्ट, फौजदारी, रेवन्यू, वैवाहिक विवाद, मोटर व्हीकल चालान जैसे विवादों का निपटान किया जाएगा।