हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा शुक्रवार को दोपहर बाद 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया। इस बार परिणाम की खास बात यह रही कि न तो काई विद्यार्थी टॉपर घोषित किया गया और न ही किसी को फेल किया गया है। गौरतलब है कि अप्रैल में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों की परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। शुक्रवार को उनका परिणाम घोषित कर दिया गया। हर बच्चे को स्कूल की इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिल में मिले नंबरों के आधार पर नंबर दिए गए हैं। ऐसे में कई मेधावी विद्यार्थी, जिन्होंने परीक्षा की अच्छी तैयारी की थी, के मन में परीक्षा नहीं देने की टीस रही। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड को व्यापक सुरक्षा इंतजाम के साथ उनकी परीक्षा लेनी चाहिए। इससे उनका सही मूल्यांकन नहीं हो पाया है।
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की काफी तैयारी की थी। आंतरिक विषयों के आधार पर परीक्षा परिणाम तैयार करना ज्यादातर विद्यार्थियों के हित में नहीं है। इस साल 10वीं कक्षा के 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पास किया गया है। वहीं 2019 में जिले के 23440 विद्यार्थियों में से 14083 विद्यार्थी पास हुए थे। 60.08 प्रतिशत परीक्षा परिणाम के साथ जींद जिला प्रदेश में नौंवे स्थान पर रहा था। साल 2020 में जींद जिले ने परीक्षा परिणाम में सुधार करते हुए 70.05 प्रतिशत परीक्षा परिणाम के साथ प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया था। पिछले साल 21391 विद्यार्थियों में से 14985 विद्यार्थी पास हुए थे।
10वीं में विद्यार्थियों के पांच-छह विषय होते हैं, जिनमें तीन-चार मुख्य विषय हैं। मुख्य विषयों की परीक्षा होनी चाहिए थी। हालांकि संक्रमण को देखते हुए सरकार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। लेकिन जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा की तैयारी की थी, उन्हें इस फैसले से ज्यादा खुशी नहीं मिली।
अंजलि, छात्रा।
परीक्षाएं होनी चाहिए थीं। विषयों के अंक कम कर परीक्षा कराई जा सकती थीं। ज्यादातर विद्यार्थी परीक्षा देने के हक में थे। ऐसे में परीक्षा केंद्रों पर कोविड नियमों का पालन करते हुए परीक्षाएं आयोजित करवानी चाहिए थी। इससे विद्यार्थी आंतरिक मूल्यांकन कर पाते। सिमरन, छात्रा।
वर्तमान परिस्थिति में संक्रमण का स्तर ज्यादा नहीं है। परीक्षा होती तो विद्यार्थियों के लिए अच्छा रहता। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को परीक्षा करवानी चाहिए थी। ऐेसे में हर मेधावी विद्यार्थी इस फैसले से खुश नहीं है। -प्रियंका, छात्रा।
जिन जगहों पर कोरोना महामारी से हालात ज्यादा खराब नहीं थे, वहां पहले फेज में परीक्षा करवाई जानी चाहिए थी। बाकी बचे इलाकों में दूसरे फेज में परीक्षा करवाएं। दोनों फेज के बीच 14 दिन का गैप होना चाहिए था। यदि कोरोना संक्रमण के कारण कोई छात्र परीक्षा नहीं दे पाता तो उसे एक मौका और मिलना चाहिए था। -नेहा, छात्रा।
ज्यादातर विद्यार्थी यही चाहते थे कि परीक्षा होनी चाहिए थी। जब संक्रमण होने पर सरकार ने दुकानदारों को दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है और अन्य औद्योगिक इकाइयां भी खुली हुई हैं तो 10वीं कक्षा की परीक्षा जरूर होनी चाहिए थी। एक कक्षा में 10 से 15 विद्यार्थियों को बैठाया जा सकता है। इससे सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रहता और विद्यार्थी मास्क पहनकर परीक्षा देते। -रामभतेरी, छात्रा।
कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विशेष तैयारी के साथ परीक्षा आयोजित करवाई जा सकती थी। 10वीं की परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए थी। क्योंकि परीक्षा के बिना विद्यार्थियों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। मुख्य विषयों के पेपर लिए जा सकते थे। सही अंक निर्धारण होने पर विद्यार्थियों में नाराजगी है। -आसमिन, छात्रा।
बच्चों का सही व तार्किक मूल्यांकन नहीं
दसवीं कक्षा का परिणाम इस वर्ष जो शत-प्रतिशत रहा है, बच्चों का सही व तार्किक मूल्यांकन नहीं है। अच्छा होता यदि व्यापक सुरक्षा प्रबंधों के साथ हिदायतों का पालन करते हुए परीक्षाएं लेकर बच्चों का सही मूल्यांकन किया जाता। पढ़ने वाले बच्चों को ऐसे परिणाम से निराशा ही हुई है। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ मांग करता है कि व्यापक सुरक्षा प्रबंधों के साथ जल्द से जल्द स्कूल खोले जाएं ताकि बेपटरी हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके। -भूप सिंह वर्मा, प्रेस प्रवक्ता, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ।