किसान इस बार दिल्ली सीमा पर ही मनाएंगे शिवरात्रि
गांवों से मिट्टी व पानी लेकर रवाना हो रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। उत्तराखंड सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई गई तो किसानों ने दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन की जगह को ही हरिद्वार बना लिया है। जहां पहले युवा हरिद्वार से कांवड़ व गंगाजल लाकर अपने आसपास के शिव मंदिरों में गंगाजल चढ़ाते थे, वहीं अब गांवों के पानी व मिट्टी से दिल्ली सीमाओं पर चल रहे धरनों पर आंदोलन को मजबूती देने के लिए विशेष पूजा की जाएगी। इसके लिए गांवों से युवा पैदल ही मिट्टी व पानी लेकर दिल्ली सीमा के लिए रवाना हो रहे हैं।
इस बार 6 अगस्त को शिवरात्रि का पर्व है। ऐसे में गांवों से बड़ी संख्या में युवा मिट्टी व पानी लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। इनमें से कुछ युवा टिकरी व सिंघु बॉर्डर पर पहुंचेंगे तो कुछ ऐसे हैं जो अपने गांव की मिट्टी व पानी को तीनों सीमाओं पर चल रहे धरने पर लेकर जाएंगे। मंगलवार को गांव मखंड से युवा किसानों का काफिला डाक कांवड़ लेकर टिकरी बार्डर दिल्ली के रवाना हुआ।
तुषार ने बताया कि गांव मखंड के युवा किसान इस बार सावन के महीने में हरिद्वार से भोले बाबा की कांवड़ लेकर आने की बजाय किसानों के नाम की डाक कांवड़ लेकर जा रहे हैं। ये युवा सरकार को जागने पर मजबूर कर देंगे। किसानों ने बताया कि गांव मखंड के खेतों की मिट्टी व गांव के जल की डाक कांवड़ यात्रा लेकर चले हैं। दिल्ली की तीनों सीमा टिकरी, गाजीपुर व सिंघु किसानों के पवित्र धाम हैं। यहां पूजा करके जल चढ़ाएंगे ताकि सरकार को कानून वापसी के लिए मजबूर किया जा सके।
फोटो नंबर
03जेएनडी 32: गांव की मिट्टी और पानी लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए मखंड के युवा। संवाद