जींद। बैंकों के निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले शुक्रवार को दूसरे दिन भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल से दो दिनों में जिले में करीब एक हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। वहीं बैंक बंद होने व एटीएम खाली होने के कारण लोगों को नकदी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी। शनिवार को बैंक खुलेंगे, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। वहीं शुक्रवार सुबह प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने कुछ देर के लिए सड़क पर खड़े होकर नारेबाजी की। इससे लघु सचिवालय के बाहर जाम लग गया।
बैंककर्मियों ने शहर में प्रदर्शन किया और मांगों को लेकर नारेबाजी की। कर्मियों की हड़ताल के चलते सरकारी बैंकों की 135 शाखाओं पर ताले लटके रहे। छह बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों ने पीएनबी के सामने नारेबाजी की। उसके बाद लघु सचिवालय तक पैदल मार्च कर रोष प्रदर्शन भी किया और गोहाना रोड पर कुछ देर जाम भी लगाया। बैंककर्मियों की दो दिनों से चल रही हड़ताल के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसबीआई की सफीदों गेट स्थित शाखा को ट्रेजरी बनाया गया है। जहां से न केवल सरकारी लेनदेन होता है, बल्कि सैकड़ों उपभोक्ता भी जुड़े हुए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उद्यमियों को हुई जो एसबीआई के माध्यम से लेनदेन करते हैं। बैंककर्मियों की हड़ताल के चलते उपभोक्ता दिनभर इधर से उधर भटकते रहे।
बैंक कर्मचारी शुक्रवार सुबह डीआरडीए के सामने स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा के बाहर एकत्रित हुए। ऑल इंडिया पीएनबी ऑफिसर एसोसिएशन के सर्कल सचिव जगदीश रेढू और पीएनबी हरियाणा स्टाफ एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन सचिव दलवीर सिंह ने कहा कि सरकार छह सरकारी बैंकों का निजीकरण करने जा रही है। इसका विरोध बैंककर्मी कर रहे हैं। जिससे न केवल सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम होंगे, साथ ही आम आदमी के लिए बैंक में खाता खुलवाना भी मुश्किल होगा। अनुमान है कि जिले में हड़ताल के कारण पिछले दो दिनों में लगभग एक हजार करोड़ से ज्यादा का लेनदेन प्रभावित हुआ।
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हड़ताल के चलते ये बैंक रहे बंद
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पंजाब नेशनल बैंक, एसबीआई, केनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, इंडियन बैंक की शाखाएं बंद रहीं। बैंक यूनियनों का कहना था कि पिछले साल दस सरकारी बैंकों का विलय कर चार बडे़ बैंक बनाए गए हैं। इन छह बैंकों का विलय नहीं हुआ। उन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी सरकार कर रही है।
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एटीएम में नहीं मिले रुपये
दो दिन से बैंक कर्मचारियों की हड़ताल चली हुई है। किसी काम से रोहतक गया था। रुपये खत्म हो गए थे। एटीएम में रुपये निकलवाने गया तो वहां भी कैश नहीं मिला। ऐसे में एक दोस्त के पास फोन कर रुपये मंगवाए। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई।
- आशीष।
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बैंक को करनी चाहिए वैकल्पिक सुविधा
बैंक कर्मचारियों को चाहिए कि अगर वह हड़ताल करें तो एटीएम में रुपये पर्याप्त मात्रा में डालें। हड़ताल के कारण बैंक से रुपये नहीं निकलवा पाए। वहीं एटीएम से एक दिन में निर्धारित रुपये ही निकाल पाते हैं। अगर ज्यादा रुपये निकलवाने हो तो बैंक से चेक के माध्यम से निकवालने पड़ते हैं। ऐसे में बैंक कर्मचारियों को भी हड़ताल पर रहने की सूचना समय पर देनी चाहिए। इससे उपभोक्ता कोई वैकल्पिक रास्ता निकाल सकें।
- अरुण।
बॉक्स
खाली हाथ लौटना पड़ा
दादी की पेंशन निकलवाने आया था। पता चला कि बैंकों की हड़ताल है। ऐसे में खाली हाथ ही लौटना पड़ा। ठंड के मौसम में बुजुर्ग को आने-ले जाने में काफी परेशानी होती है। बैंक कर्मचारियों को सूचना देनी चाहिए कि बैंक हड़ताल पर हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को काफी परेशानी होती है। अब दो या चार दिन में अगर मौसम ठीक हुआ तो दादी को फिर से पेंशन निकलवाने के लिए लेकर आना होगा।
- अभिषेक।