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Jind News: जिले में रजिस्टर्ड हैं 42 हीमोफीलिया मरीज

Wed, 15 Apr 2026 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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15जेएनडी29-नागरिक अस्पताल ​​स्थित ब्लड बैंक। संवाद - फोटो : 1
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जींद। हीमोफीलिया दिवस हर वर्ष विश्व 17 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य हीमोफीलिया और अन्य रक्तस्राव विकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
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जींद में फिलहाल 42 मरीज रजिस्ट्रर्ड हैं। इनमें 37 मरीज फैक्टर आठ हीमोफीलिया और पांच मरीज फैक्टर नौ हीमोफिलिया के हैं। वहीं नागरिक अस्पताल में जीवनरक्षक फेक्टर इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में है। हालांकि पिछले साल फेक्टर इंजेक्शन खत्म हो गए थे जो कि मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर खरीदने पड़ रहे थे लेकिन इस बार नागरिक अस्पताल में एक माह से ऊपर स्टॉक है।
फिलहाल जिले में सिर्फ प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जाती है। यदि गंभीर रक्तस्राव हो जाए तो यहां पर कोई विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं है। मरीज को रोहतक मेडिकल, दिल्ली या चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है।
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हीमोफीलिया के मरीज को फेक्टर 8, 9 इंजेक्शन जरूरी होता है। यदि ऐसे मरीज को चोट लग जाए तो रक्तस्राव को रोकना बेहद मुश्किल होता है। रक्तस्त्राव को रोकने के लिए इन मरीजों को फेक्टर 8, 9 के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन मरीजों को मुफ्त लगाए जाते हैं लेकिन अगर बाजार से यह इंजेक्शन लगाए जाएं तो बहुत महंगे पड़ते हैं।
बॉक्स
हीमोफीलिया के लक्षण
-चोट या दांत निकलवाने के बाद सामान्य से अधिक समय तक खून बहना।
-जोड़ों में ब्लीडिंग और दर्द घुटनों, कोहनी या टखनों जैसे जोड़ों में बिना किसी चोट के अचानक ब्लीडिंग होना।

-त्वचा पर आसानी से और बड़े-बड़े नीले निशान पड़ना।

-बिना किसी खास कारण के नाक से ब्लीडिंग होना।
-गहरे जख्म या बिना किसी चोट के मांसपेशियों में खून जमा होना।

-ब्रश करते समय या दांतों की समस्याओं के कारण मसूड़ों से लगातार खून आना।

-सिर में चोट लगने के बाद अगर तेज सिरदर्द, उल्टी, या सुस्ती जैसी स्थिति हो, तो यह मस्तिष्क में आंतरिक ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है, जो बहुत खतरनाक है।

बार-बार होने वाले रक्तस्राव का असर बच्चों की पढ़ाई और युवाओं के रोजगार पर भी पड़ता है। मरीजों को उन्नत उपचार जैसे प्रोफिलैक्सिस और नॉन-फैक्टर थेरेपी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी और पुनर्वास सेवाओं को भी सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। -आशुतोष शर्मा, प्रधान, हीमोफीलिया सोसायटी जींद
वर्जन
हीमोफीलिया दो तरह का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर आठ की कमी होती और हीमोफीलिया बी में घटक नौ की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी है। यह एक दुर्लभ बीमारी है। -डॉ. शिप्रा, इंचार्ज, ब्लड बैंक, जींद
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