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Jind News: वर्ष 2024 ने बदली जिले की राजनीति, भाजपा ने गिराए धुरंधरों के किले

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30जेएनडी35:डॉ. कृष्ण मिड्ढा।
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जींद। जींद को राजनीति का गढ़ माना जाता है। इस गढ़ को इस बार भाजपा ने अपनी राजनीतिक मोहरों की बिसात में फंसाकर काबू किया है। वर्ष 2024 में हुए चुनाव में भाजपा ने जींद जिले की चार विधानसभाओं को जीता। यहां पर भाजपा के सामान्य चेहरों ने बड़े राजनीतिक कद के नेताओं को करारी हार दी। जिले में कांग्रस को एक सीट जुलाना की मिली तो वहीं इनेलो व जजपा का खाता भी नहीं खुल पाया।
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जींद की राजनीति में लंबे अर्से से इंडियन नेशनल लोकदल तो बाद में जजपा का जोर रहा। इससे 20 वर्ष पहले यह स्थित जिले में कांग्रेस की थी। उस दौरान चार सीटें कांग्रेस की तो सफीदों से एक विधायक बच्चन सिंह आर्य आजाद जीते थे। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने साइलेंट वोट बैंक के दम पर सभी राजनीतिक दलों को आसानी से चित कर दिया। इसमें जजपा के बड़े चेहरे एवं उपमुख्यमंत्री रहे दुष्यंत चौटाला व राजनीति में लंबे अर्से से अपनी पहचान बनाए पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह डूमरखां के बेटे पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह को भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता रहे देवेंद्र अत्री के हाथों विधान सभा क्षेत्र उचाना से हार का सामना करना पड़ा।
जिले की सबसे हॉट सीट को भाजपा ने जीता, हालांकि किसान संगठनों ने पूरे प्रदेश में इसी सीट पर भाजपा का सबसे ज्यादा विरोध किया था। इसके अलावा जजपा ने जुलाना व नरवाना की सीट को बीते चुनाव में बड़े वोट बैंक से जीता था, लेकिन नरवाना के गढ़ को इस बार भाजपा ने जीता, वहीं जुलाना में भाजपा उम्मीद्वार को कांग्रेस उम्मीदवार अंतराष्ट्रीय रेसलर विनेश फौगाट ने हरा दिया। कांग्रेस को केवल एक सीटी विनेश फौगाट ही दिलवा पाई। इसके अलावा सफीदों विधानसभा में जजपा के सता में रहते पार्टी की बगावत कर अपनी विशेष पहचान बनाने वाले विधायक रामकुमार गौतम ने कांग्रेस के उम्मीद्वार को चित किया। जिले में इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव ने जजपा व इनेलो का खाता नहीं खुलने दिया।
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उपमुख्यमंत्री रहते दुष्यंत चौटाला को उचाना में सबसे अधिक काम करने का श्रेय
उपमुख्यमंंत्री रहते दुष्यंत चौटाला ने उचाना विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक विकास करवाने का भी लोग श्रेय दे रहे हैं, लेकिन इस चुनाव में उनकी जमकर मतदाताओं ने खिलाफत की। इसके चलते उनको करारी हार का सामना करना पड़ा। इनके अलावा जींद विधानसभा में डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने अपने शांत स्वभाव से राजनीतिक की और पूर्व मंत्री स्वर्गीय मांगेराम के बेटे महाबीर गुप्ता को चुनाव में ज्यादा वोटों के अंतराल से हराकर जीत दर्ज की थी। इसकी बदौलत सरकार में डॉ.कृष्ण मिड्ढा को डिप्टी स्पीकर का पद मिला।
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जिले के लोगों ने भाजपा को किया मजबूत तो घटी जिले की राजनीतिक ताकत
जिले के लोगों ने पहली बार चार विधानसभा सीटों पर कमल खिलाया। इसके बावजूद भी जिले की राजनीतिक ताकत कम हुई। बीते भाजपा जजपा के कार्यकाल में जिले को राजनीति में बड़ी ताकत उपमुख्यमंत्री के तौर पर मिली थी। इस बार मंत्रालयों के मामले में जिला पिछड़ा है, जबकि डिप्टी स्पीकर के पद की बेहतर सौगात मिली है। नरवाना से जीते कृष्ण बेदी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन विभाग कम होने के कारण ताकत कम आंकी जा रही है।
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जिले में सबसे अधिक हुआ भाजपा का विरोध
जिले में किसान आंदोलन के चलते जजपा व भाजपा का सबसे अधिक विरोध किसान नेताओं द्वारा किया गया। इन दोनों संगठनों के नेताओं के गांवों में घुसने पर भी रोक लगी थी। इसके बावजूद भी जिले के मतदाताओं ने सबसे अधिक भरोसा भाजपा पर जताया।
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अंतराष्ट्रीय ओलंपिक में वजन ज्यादा होने के चलते कुश्ती से बाहर हुई विनेश
रेसलर विनेश फौगाट को ओलंपिक संघ के नियम के अनुसार निर्धारित से ज्यादा वजन होने पर अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके कारण उनको कोइ पदक नहीं मिला। इस दौरान जिले को बड़े पदक की उम्मीद थी। इसके कारण विनेश फौगाट पूरी तरह से टूट गई और बाद में राजनीतिक अखाड़े में कुद गई। इस राजनीतिक अखाड़े में विनेश ने पहली बार में जुलाना विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। जिले की एकमात्र सीट विनेश फौगाट ने कांग्रेस पार्टी को दिलवाई।

30जेएनडी35:डॉ. कृष्ण मिड्ढा।

30जेएनडी35:डॉ. कृष्ण मिड्ढा।

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