संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। शहर में कोर्ट परिसर के पीछे रेलवे लाइन के नीचे बन रहे अंडरपास का काम पिछले दो माह से पूरी तरह बंद पड़ा है। विभागों के बीच समन्वय की कमी और वन विभाग से पेड़ों की कटाई की मंजूरी लंबित होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पिछले साल रेलवे ने अंडरपास निर्माण के लिए रेलवे की ओर से काम शुरू कराया गया था लेकिन सड़क के अधिकार क्षेत्र को लेकर मामला उलझ गया। संबंधित सड़क किस विभाग के अधीन आती है इसकी जानकारी के लिए कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं।
लेकिन अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। इस कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। वहीं इस मामले में जिला प्रशासन और रेलवे के बीच तालमेल की कमी भी सामने आई है। अंडरपास निर्माण में सबसे बड़ी बाधा पेड़ों की कटाई भी बनी हुई है।
निर्माण स्थल पर कई पेड़ आड़े आ रहे हैं, जिन्हें हटाए बिना आगे का कार्य संभव नहीं है। वन विभाग भी गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है, जिसके कई बार संज्ञान में लाने के बावजूद अब तक पेड़ नहीं काटे गए हैं।
ऐसे में कई बार पत्राचार और मौखिक स्तर पर बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। लोगों को राहत मिलने की उम्मीदें फिलहाल अधर में लटक गई हैं।
शहरवासी अधिवक्ता नरेंद्र सिंहमार, मनीष पांचाल, दलेर सिंह, सतीश कुमार का कहना है कि अंडरपास बनने से रेलवे फाटक बंद होने पर लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। करोड़ों की परियोजना विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ रही है।
वर्जन
अंडरपास के लगते सड़क किस विभाग की है उसकी जानकारी के लिए रेलवे की तरफ से डीसी कार्यालय को कई बार पत्र लिखा जा चुका है लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारी हासिल होते ही तुरंत खुदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
जयभगवान, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, रेलवे
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उनके पास रेलवे की ओर से ऐसा कोई पत्र नहीं आया है। रेलवे अधिकारी कई बार बुलाई गई बैठकों में भी शामिल नहीं होते। बस निचले क्रम के कर्मचारियों को भेज देते हैं, जिससे समस्या के समाधान में देरी हो रही है। रेलवे अधिकारी किसी भी दिन उनके कार्यालय में आए। इस समस्या का तुरंत समाधान हो जाएगा
मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद