संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। ऐतिहासिक नगर जींद को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। रिंग रोड की फाइल पर 9 साल से जमी धूल डिप्टी स्पीकर की फटकार के बाद नेशनल हाईवे ऑथोरिटी (एनएचएआई) ने झाड़ ली। 10 गांवों को जोड़ते इस प्रोजेक्ट के लिए ड्रोन से जमीन का सर्वे कराया गया है।
साढ़े आठ किमी लंबे रिंग रोड की घोषणा 11 दिसंबर 2016 को हुई थी। इसे नरवाना रोड से बरवाला रोड तक बनाया जाना था। आगे रोहतक रोड बाईपास से कनेक्टिविटी मिलनी थी। घोषणा के करीब दो साल तक काम शुरू नहीं हो पाया। फिर यूनिहॉर्न प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का जिम्मा दिया गया। काम बीच में ही छोड़ कंपनी पीछे हट गई।
बाद में रिंग रोड को तितरम मोड़-हांसी फोरलेन प्रोजेक्ट में शामिल किया गया। 2018-19 में एनएचएआई ने तितरम मोड़-हांसी फोरलेन प्रोजेक्ट को ड्रॉप कर दिया। 2020 में तत्कालीन डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला भी ने एचएसआरडीसी से इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने में नाकाम रहे। 2022 में जींद से विधायक बने डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने मनोहर लाल के सामने रिंग रोड का मुद्दा फिर उठाया। फिर भी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहा।
सप्ताहभर पहले प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में डिप्टी स्पीकर डॉ़ कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि जींद तेजी से विकसित हो रहा है। आने वाले वर्षों में यहां यातायात का दबाव और बढ़ेगा। ऐसे में रिंग रोड से संबंधित सभी तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं को जल्द पूरा किया जाए।
इस निर्देश के बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने बंद पड़ी फाइलों को पंख लगा दिए।
रिंग रोड की जमीन के लिए ड्रोन से सर्वे भी करवाया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार रिंग रोड शहर से लगते जुलानी, राजपुरा, ईक्कस और किनाना समेत 10 गांवों की सीमा को टच करेगा।
रिंग रोड निर्माण जमीन का सर्वे करवाया गया है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेज दी है। अब आगामी कार्रवाई के लिए मुख्यालय की रिपोर्ट का इंतजार है।
-विपिन मंगला, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई हिसार।
रिंग रोड बनने से होंगे ये फायदे
• कैथल रोड, बरवाला, हांसी रोड, भिवानी रोड, रोहतक रोड तक सभी मार्ग शहर से बाहर ही जुड़ जाएंगे।
• वाहन बाहर से निकलने से शहरवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी।
• विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
अभी ये है शहर की स्थिति
मौजूदा स्थिति में जींद से नरवाना, रोहतक, कैथल और पानीपत की ओर का ट्रैफिक शहर के अंदर से ही गुजरता है। इस कारण बस स्टैंड, रेलवे रोड, सफीदों गेट, रोहतक रोड पर जाम लगना आम बात है। भारी वाहनों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
ये हैं चुनौतियां
इस परियोजना के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। जमीन अधिग्रहण, किसानों की सहमति, बजट स्वीकृति और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे मुद्दों को सुलझाना होगा।