जींद। बेमौसमी बारिश तथा ओलावृष्टि ने किसानों के सपने चकनाचूर कर दिए हैं। बारिश से फसलों को हुए खराबे को लेकर मंगलवार को 300 किसानों ने कृषि विभाग मे आवेदन किए हैं। सबसे ज्यादा आवेदन अब तक जुलाना तथा जींद से आए हैं। मंगलवार को किसान संगठन डीसी मनोज कुमार तथा कृषि उपनिदेशक से मिले ओर बेमौसमी बारिश से फसलों को हुए नुकसान की है। पिछले 24 घंटे में जिले में औसतन 14 एमएम बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा जींद में 29.4 व जुलाना में 28 एमएम बारिश हुई। इसके अलावा नरवाना में चार, सफीदों में छह, पिल्लूखेड़ा में सात तथा अलेवा में 18 एमएम बारिश हुई। बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से गेहूं की फसल गिर गई है। इससे गेहूं की फसल को 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है। कृषि विभाग नुकसान के आकलन करने में जुट गया है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री, न्यूनतम तापमान 14 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम में आर्द्रता 58 प्रतिशत, हवा की गति छह किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई।
बारिश से जींद तथा जुलाना में सबसे अधिक फसलों को नुकसान हुआ है। उचाना व नरवान में सरसों की फसल को अधिक नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल पकाव की तरफ है। फसल गिरने अब दाना काला पड़ जाएगा। मंगलवार को भी खेतों में बारिश का पानी जमा रहा। कृषि विभाग ने कहा कि किसान अपनी फसल में हुए नुकसान की शिकायत 72 घंटे में दे सकते हैं। वहीं काफी संख्या में किसान मंगलवार को डीसी कार्यालय में पहुंचे और मुआवजे की मांग को लेकर डीसी डॉ. मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा कंडेला खाप व माजरा खाप ने भी फसलों में हुए नुकसान पर मुआवजा देने की मांग की है। माजरा खाप पंचायत के प्रधान गुरविंदर सिंह संधू, सचिव महेंद्र सिंह सहारण ने बताया कि सभी गांवों में फसल गिर गई है। इससे फसल को 50 से 75 प्रतिशत नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान कटी हुई सरसों की फसल को हुआ है। प्रेस प्रवक्ता समुद्र सिंह फोर ने सरकार से 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। इस मौके पर उनके साथ जय सिंह सैनी, रघुबीर सिंह लाठर, दलेल सिंह, दीपक अलाहवत, बेदप्रकाश बूरा आदि मौजूद रहे।
किसान दें खराब हुई फसलों की शिकायत
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने कहा कि जिन किसानों की फसल खराब हुई है, वह 72 घंटों के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। मंगलवार को भी 300 किसानों ने आवेदन किए हैं। कृषि विभाग नुकसान का आंकलन कर रहा है। जल्द ही रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी जाएगी। 25 मार्च तक फिर मौसम खराब पांडू पिंडारा कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेश ने बताया कि बारिश से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। 26 मार्च तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। गरज व चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। अधिकतम तापमान 23 से 26 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 12 से 16 डिग्री के बीच रहेगा। हवा की सात से 17 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।
जुलाना में भारी नुकसान
जुलाना ब्लॉक के गांवों में बारिश का पानी की सबसे ज्यादा मार होती है। यहां पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। यहां के पोली, हथवाला, किलाजफरगढ़, किनाना, बराड़ खेड़ा, बुआना आदि गांवों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस क्षेत्र में सरसों की फसल की बिजाई नहीं की जाती है। पोली गांव के किसान कृष्ण, अशोक व धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने 40 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर लेकर गेहूं की फसल बोई थी, लेकिन बरसात से उनकी पकी पकाई फसल को खराब कर दिया है। किसानों की मांग है कि गिरदावरी करवाकर उन्हें मुआवजा दिया जाए। खंड कृषि अधिकारी डॉ. सूरजमल ने कहा कि जिन किसानों की फसल खराब हुई है, वह इसकी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं, जिसका टोलफ्रीनंबर 18001802117 है।
उचाना में ओलावृष्टि ने भी किया काफी नुकसान
उचाना खंड के गांव सुदकैन खुर्द, लोधर, छातर, कुचराना कलां, कुचराना खुर्द, मांडी, संडील, थुआ, भौंसला, धनखड़ी, खटकड़, काब्रच्छा, करसिंधु, अलीपुरा समेत अन्य गांवों में बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि भी हुई है। इससे फसल को काफी नुकसान हुआ है। इन गांवों में सरसों की फसल भी अच्छी होती है। सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। किसान राजकुमार, शीशपाल, बलजीत, सुभाष ने मुआवजे की मांग की है। भाकियू ने डीसी डॉ. मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपकर खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरादावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की है। भाकियू के जिला प्रधान बारूराम, प्रैस प्रवक्ता रामराजी ढुल, प्रकाश, जयबीर, राकेश, लीलूराम, बिंद्र नंबरदार ने कहा कि सरसों की फसल में नमी की मात्रा आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की जाए। सरसों की फसल का एक-एक दाना सरकारी खरीद से खरीदा जाए।
शहर में कई स्थानों पर जलभराव
शहर में नरवाना रोड, रानी तालाब के पास, हुडा ग्राउंड, मिनी बाईपास पर बने अंडरपास, शीतलपुरी कॉलोनी, रेलवे रोड, ओम नगर, अमरहेड़ी व हाउसिंग बोर्ड में जलभराव की स्थिति बनी रही। नगर परिषद द्वारा खराब सड़कों के गड्ढों में पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण मशीन द्वरा पानी निकाला गया।