जींद। नागरिक अस्पताल में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इससे मरीजों की जान पर खतरा मंडराने लगा है। वीरवार को हालात इतने खराब हो गए कि अस्पताल की इमरजेंसी में चिकित्सकों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का उपचार करना पड़ा।
बार-बार बिजली गुल होने से न केवल इलाज प्रभावित हुआ बल्कि मरीजों और उनके परिजनों में डर बना रहा। अस्पताल में मात्र दस मिनट के अंतराल में दो बार बिजली चली गई। इससे इमरजेंसी अंधेरे में छा गया। इस दौरान स्ट्रेचर पर गंभीर मरीजों को देखकर परिजन घबरा गए।
चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ ने किसी तरह मोबाइल टॉर्च की रोशनी में प्राथमिक उपचार जारी रखा लेकिन अंधेरे में इलाज करना किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता। स्थिति यहीं तक सीमित नहीं रही।
माइनर ओटी, चिकित्सक कैबिन और टीकाकरण कक्ष में भी बिजली न होने के कारण मोबाइल टॉर्च जलाकर काम चलाया गया। माइनर ओटी में जहां छोटे ऑपरेशन और गंभीर घावों का उपचार किया जाता है वहां इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ से कम नहीं है।
पर्याप्त रोशनी और बिजली के बिना किया गया उपचार संक्रमण और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। बिजली की समस्या कोई नई नहीं है। पहले भी कई बार बिजली गुल होने की शिकायत सामने आई है। अस्पताल प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं ले रहा। अस्पताल में वैकल्पिक बिजली व्यवस्था यानी जनरेटर भी समय पर चालू नहीं किया गया।
किसी दिन हो सकता है बड़ा हादसा
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, अस्पतालों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति और मजबूत बैकअप सिस्टम होना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में ऐसी लापरवाही सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
वर्जन
अस्पताल में किन कारणों से लाइट के कट लगे हैं। इसका पता करवाया जाएगा। इसके अलावा जो फाल्ट आया है। उसका स्थाई समाधान करवाने के लिए तकनीकी टीम को निर्देश दिए गए हैं। जनरेटर और इन्वर्टर सिस्टम को दुरुस्त करवाया जाएगा, ताकि एमरजेंसी समेत अस्पताल में कहीं भी लाइट का कट नहीं लगी।
- डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ, नागरिक अस्पताल
15जेएनडी12-नागरिक अस्पताल की एमरजेंसी वार्ड में मोबाइल की लाइट जलाकर स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर ज