संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। माता वैष्णो देवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के पांचवें दिन वारवार को आचार्य पवन शर्मा ने प्रवचन देते हुए कहा कि मां सृजनहार, पालनहार और तारनहार हैं। संसार के कण-कण में मां का वास है। वही सभी का सृजन करती हैं, पालन करती हैं और मुक्ति का मार्ग दिखाती हैं। इसलिए मनुष्य को ईर्ष्या और नफरत छोड़कर मां के विराट स्वरूप से प्रेम करना चाहिए।
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि मां ही प्रत्येक प्राणी के हृदय की धड़कन और पूरे शरीर में ऊर्जा के रूप में प्रवाहित हो रही हैं। जब वही सब कुछ कर रही हैं तो फिर ईर्ष्या किससे और नफरत किससे, मां से प्रेम करने का अर्थ उनके बनाए हुए सभी प्राणियों से प्रेम करना है। यदि कोई व्यक्ति अपने पड़ोसी से घृणा करता है और ईश्वर से प्रेम करने का दावा करता है तो उसका दावा झूठा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में मां की प्रतिमा की पूजा करना लेकिन हर प्राणी में उनका वास मानकर भी उनकी उपेक्षा करना सच्ची भक्ति नहीं, बल्कि दिखावा है। साधना ऐसी होनी चाहिए कि मनुष्य को हर जगह मां के दर्शन हों और कण-कण में उनका स्वरूप दिखाई दे। इसके लिए निरंतर भक्ति और साधना में लगे रहना चाहिए।
इसमें पूर्व नगर परिषद उपाध्यक्ष विनोद आशरी, प्रमोद सोनी, डॉ. विनोद अग्रवाल, स्पर्श सिंगला, भाल सिंह कुंडू और पीएल गिरधर ने सपरिवार मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना कर महायज्ञ में आहुति डाली। इस अवसर पर अशोक गुप्ता, कृष्ण गोपाल माटा, विकास ग्रोवर, गुलशन आहूजा, सुरेश कोचर, अशोक गुलाटी, संजय आहूजा, क्षितिज गुलाटी, कार्तिकेय शर्मा, गुलशन कोचर, पवन कोचर, जगदीश अरोड़ा, तिलक जुनेजा और कृष्ण कुमार सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।