संवाद न्यूज़ एजेंसी
सफीदों। शहर में सात मार्च को हुई पटाखा फैक्टरी अग्निकांड की घटना में डिग्गी मोहल्ला निवासी और हादसे में घायल रीना को पीजीआई से तीन माह बाद छुट्टी मिल गई है। रीना ने बताया कि उस दौरान फैक्ट्री मालिक राजू व रामकरण फैक्ट्री में आए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने जलती हुई बीड़ी फेंकी और बाहर निकल गए, जिसके बाद आग लग गई। जब उन्होंने पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की तो आग और भड़क गई।
उन्होंने फैक्ट्री मालिकों को बताया तो उन्होंने कहा कि अपने आप ही कुछ देर में बुझ जाएगी, लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। फैक्टरी में आग लगने के बाद उन्होंने बचाने के लिए आवाज लगाई लेकिन कोई भी बचाने के लिए आगे नहीं आया।
राजू व रामकरण जाते समय फैक्ट्री के मुख्य गेट पर ताला लगाकर चले गए थे। इस कारण कोई महिला मजदूर फैक्टरी से बाहर नहीं निकल पाई। रीना ने बताया कि वह तीन महिलाएं आग बुझाने की कोशिश कर रही थीं, जिनमें से दो की मौत हो गई और वह बेहोश होकर गिर गईं। फैक्टरी के अंदर धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
नहीं मिली इलाज के लिए सहायता राशि
उन्होंने बताया कि उस समय प्रशासन की तरफ से निशुल्क उपचार का आश्वासन दिया गया था लेकिन सरकार द्वारा उन्हें दो लाख रुपये की मदद दी गई है। उपचार में उनका लगभग चार लाख रुपये खर्च हो चुका है। वह तीन महीने तक रोहतक के पीजीआई में भर्ती रही। पीजीआई से आने के बाद वह पुलिस को बयान देने गई, लेकिन पुलिस ने अदालत में केस दर्ज होने के कारण उनके बयान लेने से मना कर दिया।
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हादसे में घायल महिला से इलाज के बिल मांगे गए हैं। बिल मिलने के बाद सीएमओ से सत्यापन करवाकर उनके इलाज पर आया खर्च दिलवाया जाएगा। अभी तक महिला के परिजनों ने इलाज पर हुए खर्च के बिल जमा नहीं करवाए हैं।
-पुलकित मल्होत्रा, एसडीएम सफीदों