जींद। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बाजार में लगातार हो रही आग लगने की घटनाओं ने छोटे और मध्यम व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। कभी शॉर्ट सर्किट तो कभी मामूली चिंगारी के कारण दुकानों में रखा सामान जलकर खाक हो जाता है।
कई मामलों में आग की एक घटना व्यापारियों की वर्षों की मेहनत और पूंजी को कुछ ही घंटों में खत्म कर देती है जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। व्यापारियों का कहना है कि समस्या नुकसान की भरपाई को लेकर सामने आती है। अधिकांश छोटे दुकानदारों के पास न तो पर्याप्त बीमा होता है और न ही ऐसी कोई सरकारी व्यवस्था है, जिससे उन्हें समय पर राहत मिल सके।
परिणामस्वरूप पीड़ित व्यापारी कर्ज के बोझ तले दब जाता है और परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है।
वर्जन
व्यापारियों ने कहा है कि आग की घटनाओं के लिए हर बार दुकानदार को दोषी ठहराना उचित नहीं है। कई बार जर्जर बिजली तार, ट्रांसफॉर्मरों की खराब स्थिति, संकरी गलियां और बाजारों में अग्निशमन संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं हादसों का कारण बनती हैं। इसके बावजूद नुकसान की पूरी जिम्मेदारी व्यापारी पर ही आ जाती है। इससे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नुकसान होता है, बल्कि बाजार की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को झटका लगता है।-कुलदीप शर्मा
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वज्रन
व्यापारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि आग लगने की घटना , प्राकृतिक आपदा या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में दुकानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक स्पष्ट और स्थायी राहत नीति बनाई जाए। इस नीति के तहत नुकसान का निष्पक्ष और वैज्ञानिक आकलन कर पीड़ित व्यापारी को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि वह दोबारा अपना व्यवसाय शुरू कर सके। इसके साथ ही व्यापार आयोग को अधिक अधिकार देकर राहत प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने की आवश्यकता जताई गई है।-प्रदीप बंसल
बाॅक्स
केवल बीमा को ही समाधान मानना व्यावहारिक नहीं है क्योंकि छोटे दुकानदार बीमा प्रीमियम वहन करने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में सरकारी सहयोग ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकता है। साथ ही बाजारों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, पुराने बिजली ढांचे को दुरुस्त करना और नियमित सुरक्षा जांच कराना भी जरूरी बताया गया है जिससे आगजनी की घटनाओं को रोका जा सके।
पवन तायल
17जेएनडी18: कुलदीप शर्मा।
17जेएनडी18: कुलदीप शर्मा।