24जेएनडी28: दिन में धूप निकलने पर खेत में खाद डालता किसान। संवाद
जींद। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी और बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी पड़ने लगा है। जिले में शनिवार सुबह से ही शीत लहर का प्रकोप बना रहा। इससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। सुबह के समय तेज सर्द हवा ने ठंड बढ़ा दिया। हालात ऐसे रहे कि दिन चढ़ने के बाद भी धूप लोगों को ठंड से राहत नहीं दे सकी।
मौसम में अचानक आए बदलाव से जिले का न्यूनतम तापमान दिसंबर की तुलना में भी अधिक नीचे चला गया है। खासकर सुबह और शाम के समय ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। सर्दी के कारण लोग घरों से निकलने में संकोच करते नजर आए। बाजारों में भी सुबह के समय अपेक्षाकृत कम चहल-पहल रही।
लोग अलाव का सहारा लेते दिखे। शीतलहर का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर पड़ रहा है। ठंड के चलते सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में लापरवाही से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलते समय ऊनी कपड़े पहनने, ठंडे पदार्थों से परहेज करने और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है।
कृषि क्षेत्र पर भी इस शीतलहर का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों और सब्जी की फसलें ठंड से प्रभावित हो सकती है। विशेषकर पाला पड़ने की स्थिति में फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
वर्जन
आने वाले कुछ दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियों का असर अभी बना रह सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक एहतियात बरतने की अपील की है। शीतलहर में सावधानी ही सबसे बचाव है।-डॉ. राजेश मौसम वैज्ञानिक