जींद। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार होकर चेन्नई से दिल्ली पहुंच गई है लेकिन इस ट्रेन के चलने का अब इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है। वर्ष 2026 में 9 बोगियों वाली अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी। फिलहाल शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर खड़ी की गई है। जींद-सोनीपत के बीच इसके संचालन की तैयारी चल रही है।
हाइड्रोजन प्लांट का काम पूरा हो चुका है। अब इसके नियमित संचालन शुरू होने का इंतजार बना है। जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने के लिए इसके कोचों में आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। ट्रेन का ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। हालांकि जींद में हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है।
यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है जिसके संचालन के दौरान केवल पानी और भाप का उत्सर्जन होता है। डीजल ट्रेनों की तुलना में इसमें कार्बन उत्सर्जन शून्य है जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। यह ट्रेन करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलने में सक्षम है, जबकि इसकी सामान्य गति लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।
इस ट्रेन में करीब 2,500 यात्रियों के सफर करने की क्षमता है। करीब 1,200 हॉर्स पावर वाली इस हाइड्रोजन ट्रेन पर लगभग 82 करोड़ रुपये की लागत आई है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भारतीय रेलवे को हरित और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
वर्जन
रेलवे जंक्शन का भवन का निर्माण पूरा हो गया है। अब ट्रेन के चलने का इंतजार है। नववर्ष में ट्रेन के चलने की पूरी उम्मीद है।-जेएस कुंडू, अधीक्षक, रेलवे जंक्शन जींद
इंसेटफरक्का एक्सप्रेस ट्रेन सुविधा मुहैया हुई
इस साल जिलावासियों को रेलवे की बेहतर सौगात मिली। इनमें अयोध्या में श्रीराम के दर्शन करने के लिए सीधी फरक्का एक्सप्रेस ट्रेन सुविधा मुहैया हुई। इसके अलावा उदयपुर से चंडीगढ़ के लिए भी यात्रियों का सफर सुनहरा हुआ, जहां पहले उदयपुर के लिए कोई ट्रेन नहीं थी। वहीं रेलवे ट्रैक की पटरियों को बदला गया जिससे ट्रेनों की रफ्तार में इजाफा हुआ।
बाक्स
20 साल बाद बस स्टैंड के अंदर बसों का आवागमन शुरू
जींद। उचाना को बस स्टैंड की सौगात आज से करीब 30 साल पहले 1995 में तत्कालीन सीएम भजन लाल ने उद्घाटन करके दी हो लेकिन बस स्टैंड के अंदर कई सालों से बसों का आवागमन बंद था। ऐसे में बसें बस स्टैंड के अंदर जाने की बजाए सड़क पर ही रुकती थी। विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री द्वारा विधानसभा सत्र में बस स्टैंड बनने के बाद भी बसें बस स्टैंड के अंदर नहीं जाने का मुद्दा उठाया। अब बस स्टैंड के अंदर बसों का आवागमन होने से यात्रियों को राहत मिली है।
इंसेट
जींद को इस वर्ष मिली दस नई एसी बसें
जींद डिपो को वर्ष 2025 में दस एसी बसें मिली हैं। इन बसों को जींद से चंडीगढ़ और गुरुग्राम रूट पर चलाया गया। डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा इन बसों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया था। जींद रोडवेज के बेड़े में 170 के करीब साधारण बस पहले से ही चल रही थी। इनमें एक भी एसी बस नहीं है। यात्रियों द्वारा लंबे रूटों पर एसी बसों की डिमांड की जा रही थी। जींद से चंडीगढ़, दिल्ली, गुरुग्राम के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, पांवटा साहिब, सालासर बालाजी, अमृतसर, लुधियाना जैसे लंबे रूटों पर भी साधारण बसें ही जा रही थी। अब इन रुटों पर एसी बस दौड़ रही हैं।
फोटो कैप्शन
27जेएनडी42: नौ बोगियों वाली अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर खड़ी। स्रोत : कर्मचारी