जींद। सवा दो लाख से अधिक आबादी वाले शहर में पेयजल व्यवस्था बिगड़ी है। शहर की 10 से ज्यादा काॅलोनियों में न तो नलों में पानी आता है और न ही लोगों को साफ पानी नसीब हो पा रहा है। हालात यह है कि कड़ाके की ठंड में भी लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं।
शहर की कई बाहरी काॅलोनियों में आज तक पेयजल लाइन ही नहीं बिछाई गई। वहीं कुछ ऐसी कालोनियां भी हैं जहां आठ से दस साल पहले लाइन तो डाल दी गई लेकिन उसे आज तक चालू नहीं किया गया। नतीजा यह कि लोग मजबूरी में खारा और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पानी पी रहे हैं। इसमें टीडीएस की मात्रा 500 से 1000 तक पहुंच चुकी है।
शहर के वार्ड 16 के डेढ़राज मोहल्ला, हनुमान गली, वार्ड 15 के दखनिया मंदिर एरिया और सैनी मोहल्ले में 30 साल से ज्यादा पुरानी सीवर और पेयजल लाइनें जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह से सीवर लाइन लीक हो रही है। इसका गंदा पानी पेयजल लाइन के ज्वाइंटों से होकर घरों तक पहुंच रहा है। कई इलाकों में नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा है, जिसे पीना तो दूर, हाथ धोने में भी डर लगता है।
वर्जन
कॉलोनी में सीवर लाइन 50 साल से पहले की है। पेयजल लाइन 2012 में बदली गई लेकिन पुरानी सीवर लाइन को नहीं बदला गया। अब हालत यह है कि सीवर का पानी सप्लाई में मिलकर आ रहा है जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।- धर्मपाल प्रधान, डेढ़राज मोहल्ला निवासी
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काॅलोनी में पेयजल की बेहतर सुविधा के लिए काॅलोनीवासियों ने कई माह पहले शिकायत दी थी कि सीवर और पेयजल लाइन बदली जाए लेकिन बिना लाइन बदले ही गली का निर्माण कर दिया गया। बरसात में सीवर ओवरफ्लो होता है और नलों से गंदा पानी आने लगता है।-मोनू सैनी, सैनी मोहल्ला निवासी
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गुप्ता कॉलोनी, भूपेंद्र नगर और टपरीवास कॉलोनी में पेयजल लाइन नहीं है। यहां लोग 1500 से 2000 टीडीएस वाला पानी पी रहे हैं। कुछ गलियों में लाइन तो बिछाई गई थीं लेकिन कनेक्शन ही नहीं जोड़े गए और अब वह लाइन बंद पड़ी है।- संजय गोयल
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कुम्हारन मोहल्ला में सप्लाई इतनी कम आती है कि लोग सबमर्सिबल पर निर्भर हैं। 40 साल पुरानी लाइनों की क्षमता आज की आबादी के हिसाब से नाकाफी है। इसको कई बार नई लाइन में तबदील करवाने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। कई-कई दिन बाद पानी आता है।-कौशल्या देवी
वर्जन
अमृत-2 योजना के तहत 250 किलोमीटर नई पेयजल लाइन बिछाने का काम चल रहा है। भाखड़ा नहर से पानी लाने की परियोजना पर भी काम जारी है। एक वर्ष में शहर में पेयजल की किल्लत खत्म हो जाएगी। फिलहाल ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई शहर में हो रही है। -भानू प्रताप, एक्सईन जनस्वास्थ्य विभाग जींद।
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08जेएनडी37: शहर की एक कालोनी में बिछाई जा रही पेयजल की लाइन। स्रोत : कालोनीवासी