जींद। दिवाली के बाद से जिले में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। रविवार को भी एक्यूआई का स्तर 260 के आसपास रहा, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे आमजन को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और श्वसन संबंधी समस्याएं हो रही हैं।
खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों के लिए यह समस्या ज्यादा बनी है लेकिन जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। इससे लोगों परेशानी बढ़ी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 21 अक्टूबर को जिले का एक्यूआई 421 तक पहुंच गया था जो देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो गया। 23 अक्टूबर को यह 305 पर था जबकि रविवार यानी 26 अक्टूबर को 260 के स्तर पर स्थिर रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। जिले में अब तक केवल 10-15 मामले पराली जलाने पर किसानों पर दर्ज हुए हैं। ठन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया लेकिन सेंट्रल प्रदूषण बोर्ड की टीम ने 23 अक्टूबर को जिले का दौरा किया और पराली के अलावा अन्य स्रोतों की जांच की।
इसके कारण जिले के अस्पतालों में श्वसन रोगियों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ व सांइटिस बी अनिल कुमार ने बताया कि वह मॉनिटरिंग कर रहे हैं लेकिन हवा की गति कम होने से प्रदूषण कम नहीं हो रहा। इसके अलावा प्रदूषण कम करने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।