जींद। पिछले पांच साल से रोडवेज डिपो में नई बस आने का इंतजार अब खत्म होगा। डिपो के बेड़े में अगले महीने दस नई बसें शामिल हो जाएंगी। बसों के आने से डिपो यात्रियों को सुगम सफर करवाएगा। किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही बसों के साथ-साथ रोडवेज बसें भी लंबे रूटों पर दौड़ती नजर आएंगी। अब फिलहाल नाममात्र ही रोडवेज बसें लंबे रूटों पर चल रही हैं। गुरुग्राम में बन रही बसों का कार्य अंतिम चरण में है। नई बसों की खास बात यह है कि पुरानी रोडवेज बसों से बड़ी है। इन नई बसों में 57 सीटें होंगी जो कि पुरानी रोडवेज बसों में 52 सीटें हैं। डिपो प्रबंधन के अनुसार सितंबर माह में प्रदेश के अन्य डिपो के साथ-साथ जींद डिपो में भी नई बसें पहुंच जाएंगी। इससे जींद डिपो का बेड़ा मजबूत होने के साथ-साथ बसों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। यात्रियों को सफर के दौरान कोई परेशानी नहीं होगी। उन्हें बेहतर परिवहन सेवा मिलेगी।
जींद डिपो के घटते बेड़े में सरकार नई बसें शामिल कर रही है। इससे पहले वर्ष 2017 में 30 नई शामिल हुई थी। उस समय भी डिपो को नई बसों की काफी जरूरत थी, क्योंकि उस साल कई बसें कंडम हो गई थी। पिछले चार-पांच सालों से भी डिपो को नई बसों के आने की दरकार थी, लेकिन हर साल उम्मीद में ही निकल रही थी। सरकार ने साल की शुरुआत में रोडवेज की नई बसें डिपो में शामिल करने की घोषणा की थी और गुरुग्राम में नई बसों की चेसी तैयार करने का काम शुरू हो गया था। हालांकि सरकार ने कुछ डिपो में दो-दो नई बसें भेज भी थी। नई बसों के आने से डिपो के बेड़े में 122 बसें हो जाएंगी।
लगातार कम हो रही थी बसों की संख्या
रोडवेज बेड़े में नई बस शामिल करने के लिए डिपो प्रबंधन ने मुख्यालय को कई बार पत्र लिखे थे, क्योंकि बेड़े में हर माह बसों की संख्या कम हो रही थी। बसों की कार्य सीमा पूरी होने के बाद उन्हें कंडम घोषित कर वर्कशाप में खड़ा कर दिया जाता था। उस समय बेड़े में बसों की संख्या 140 के पार थी। फिर सरकार ने बेड़े में कोई नई बस शामिल नहीं की। इसके बाद वर्ष 2017 में डिपो में 30 नई बस पहुंची। इससे बेड़े को मजबूती मिली और बसों की संख्या 160 के पार हो गई थी। पिछले चार सालों की बात करें तो डिपो में नई बसें शामिल नहीं हो पाई थी।
इसी माह कंडम हो रही हैं दस बसें
डिपो में फिलहाल 122 बसें हैं, जिनमें 30 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत आई हुई हैं। इसके अलावा पांच गुलाबी बसें हैं। सितंबर माह के दौरान नई दस बसें शामिल हो रही हैं वहीं दस बसें कंडम होकर रूटों से बाहर हो जाएंगी। अगस्त माह में दस बसें अपनी कार्य सीमा पूरी कर कंडम हो रही हैं। अभी जुलाई माह में भी छह बसें कंडम हो चुकी हैं। इसके अलावा वर्ष 2020-21 में डिपो से 40 बसें कंडम हुई थी, जिनको रूटों से हटा दिया था।
कंडम बसों को रूटों पर उतारने की योजना
अपनी कार्य सीमा पूरी कर कंडम हो चुकी बसों की मरम्मत कर दोबारा से सरकार उनको रूटों पर उतारने का योजना बना रही है। यह बसें एक-दो साल के लिए चलाई जाएंगी। हालांकि पिछले आठ साल की बात करें तो 140 बसें कंडम हो चुकी हैं। डिपो में चलने योग्य कम जबकि कंडम बसें ज्यादा खड़ी हैं। यदि इन बसों को दोबारा रूटों पर लाया गया तो यात्रियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह बसें रामभरोसे ही चल पाएंगी।
सितंबर माह की शुरुआत में डिपो को दस नई बसें मिल जाएगी। इससे डिपो का बेड़ा ओर ज्यादा मजबूत हो जाएगा। खास बात यह है कि पुरानी के मुकाबले नई बसें बड़ी है। उनमें 57 सीट है जबकि पुरानी बसों में 52 सीट है। नई बसों के आने से यात्रियों को बेहतर परिवहन सेवा मिलेगी।
अशोक कौशिक, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो।