जींद। निपुण हरियाणा मिशन के तहत जिले में आयोजित बालवाटिका-3 प्रशिक्षण संपन्न हो गया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य अध्यापकों को बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास के लिए तैयार करना था। प्रशिक्षण में 160 अध्यापकों ने भगा लिया।
जिला निपुण मिशन को ऑर्डिनेटर राजेश वशिष्ठ ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अध्यापकों को पंचकोष विकास सिद्धांत और पंचपदी अवधारणा के बारे में जानकारी दी गई। इन सिद्धांतों के माध्यम से बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास को समझाया गया। इसके अलावा प्रशिक्षण में खेल, अभिनय, कला और पुस्तक कोना जैसे इनोवेटिव तरीके शामिल किए गए। इन तकनीकों से यह सुनिश्चित किया गया कि शिक्षण प्रक्रिया न केवल प्रभावी हो, बल्कि बच्चों के लिए मनोरंजक भी बने।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में मॉडल संस्कृति विद्यालयों और नॉन मॉडल संस्कृति विद्यालयों के लिए चार बैच बनाए गए। अध्यापकों ने शिक्षण पद्धति और गतिविधियों को स्कूल स्तर पर लागू करने की प्रतिबद्धता जताई। निपुण हरियाणा मिशन प्रारंभिक स्तर की शिक्षा को सशक्त बनाने और बच्चों में पढ़ने, लिखने और गणना की बुनियादी दक्षताओं को विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
क्या है पंचकोष विकास सिद्धांत और पंचपदी अवधारणा
पंचकोष विकास सिद्धांत : यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास को संतुलित करने की प्रक्रिया है।
पंचपदी अवधारणा : यह शिक्षण प्रक्रिया को पांच चरणों (अनुभव, समझ, अभ्यास, अभिव्यक्ति और समेकन) में विभाजित करती है।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम : इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को हरियाणा में शिक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत और परिणाम-उन्मुख बनाएगा।
08जेएनडी13: बाल वाटिका प्रशिक्षण के समापन पर शिक्षकों को प्रमाण पत्र देते हुए। स्वंय