जींद। स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षय रोग (टीबी) को 2025 तक जड़ से समाप्त करने के लिए बीसीजी का टीका लगाने का अभियान शुरू किया है। अभियान से पहले स्वास्थ्य विभाग सर्वे करा रहा है। इसमें 18 वर्ष से ऊपर के लोगों की पहचान की जाएगी जो धूम्रपान करते हैं या पांच साल पहले क्षय रोग बीमारी से ग्रस्त हुए थे।
अगर किसी परिवार में तीन साल पहले किसी को क्षय रोग हुआ है तो वह भी इसमें शामिल किया जाएगा। ऐसे लोगों का आंकड़ा एकत्रित किया जाएगा और फिर उनकी उन्हें बीसीजी का टीका लगाया जाएगा। वर्ष 2023 में स्वास्थ्य विभाग को टीबी के 2800 मरीज मिले थे। जींद में वीरवार से सर्वे की शुरुआत की गई। अभियान के तहत आशा वर्कर्स घर-घर जाकर टीबी मरीज की पहचान करेंगी। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट तैयार होगी और फिर बीसीजी वैक्सीन लगाने का शेड्यूल तैयार किया जाएगा। सर्वे में दो सप्ताह का समय लगेगा।
टीकाकरण को लेकर कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सर्वे में जिन लोगों की पहचान होगी, उनसे बीसीजी का टीका लगाने की अनुमति भी ली जाएगी। पहले तीन महीने में प्रत्येक माह एक-एक वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके बाद हर तीसरे माह में एक वैक्सीन लगाई जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया तीन साल में संपन्न होगी। जिन लोगों को यह वैक्सीन लगाई जाएगी, स्वास्थ्य विभाग उनकी निगरानी व स्टडी भी करेगा कि तीन साल में वैक्सीन का क्या रिजल्ट निकलता है। अगर रिजल्ट अच्छा रहा तो इस वैक्सीन को भविष्य में नियमित किया जाएगा। इसके अलावा 60 वर्ष से ऊपर के हर व्यक्ति को टीबी की वैक्सीन लगाई जाएगी। बाकायदा गांवों में स्पेशल कैंप भी लगाए जाएंगे।
2025 तक देश को टीबी से मुक्त करना है। बीसीजी वैक्सीन लगाने के लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है। दो से तीन सप्ताह में बीसीजी वैक्सीन लगाने का शेडयूल तैयार कर दिया जाएगा। टीबी के मरीज को इलाज की पूरी अवधि के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार भत्ता दिया जाता है।-
डॉ. संदीप लोहान, जिला क्षय रोग अधिकारी।