उचाना। 2019 के विधान सभा चुनाव के बाद से भाजपा में पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह को तवज्जो न मिलने से उनके समर्थन आहत हैं। उनका कहना है कि बीरेंद्र सिंह इस माह कोई बड़ा फैसला ले सकते है। प्रदेश के खुद के विश्वसनीय 21 साथियों की कमेटी बनाई गई है जो निरंतर इसको लेकर मंथन कर रही है।
दो अक्तूबर 2023 को जींद में आयोजित मेरी आवाज सुनो कार्यक्रम में भीड़ जुटा बीरेंद्र सिंह अपनी राजनीति ताकत दिखा चुके हैं। जो 21 सदस्यों की कमेटी है उसका उद्देश्य है कि जो मेरी आवाज सुनाे कार्यक्रम था, उसके प्रभाव को चुनावी समय तक आमजन पर रहे, इसको लेकर निरंतर यह कमेटी पत्रकारवार्ता, सेमिनार सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित करेगी। अब तक इस कमेटी की दो बैठक हो चुकी है। एक दिल्ली तो एक बीते दिनों उचाना में हुई थी। तीसरी बैठक जल्द होने वाली है। इसके बाद बीरेंद्र सिंह बड़ा फैसला ले सकते हैं। बीते दिनों जो प्रदेश पदाधिकारी बनाए गए थे उनमें भी किसी भी बीरेंद्र सिंह के समर्थक को जगह नहीं दी गई।
बीरेंद्र सिंह पिछले 50 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। केंद्र, प्रदेश में मंत्री रहने के साथ-साथ कांग्रेस में युवा एवं प्रदेश कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। प्रदेश में ऐसा कोई हलका नहीं जहां बीरेंद्र सिंह के समर्थक न हो। बीरेंद्र का खुद का प्रदेश में अपना जनाधार है। भाजपा को 2014 में सत्ता में लाने में उनकी भूमिका को अहम माना गया था। संगठन के लिए काम करने में उनको महारत हासिल है। दो अक्टूबर को जींद में आयोजित मेरी आवाज सुना सभा में खुले मंच से बीरेंद्र सिंह प्रदेश में भाजपा के साथ जजपा का गठबंधन रहने पर भाजपा छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं।