जींद। जिले के बीबीपुर गांव निवासी व पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने 2012 में बेटी नंदिनी के जन्म पर कन्या भ्रूण हत्या रोकने की शुरूआत की थी। उन्होंने बीबीपुर गांव से बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत कर इसको राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।
अभियान के तहत उन्होंने अल्ट्रासाउंड सेंटर्स की निगरानी बढ़ाई। जागरूकता रैलियां आयोजित कीं और बेटियों के जन्म पर उत्सव मनाने की परंपरा शुरू की। उनके प्रयासों से गांव में कन्या भ्रूण हत्या पर लगभग पूर्ण रोक लगी और बेटियों के लिए सैंकड़ों कार्य किए गए।
शिक्षा सहायता से लेकर स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता ने 2015 में इस राष्ट्रीय मुहिम को शुरू किया। जो बेटियों को राष्ट्र की ताकत मानकर समाज की सोच बदल रही है। मोदी के नेतृत्व ने लाखों परिवारों को प्रेरित किया कि बेटियां बोझ नहीं, गौरव हैं।
जागलान ने इस अभियान को पंचायतों के साथ मिलकर लागू किया। महिला हितैषी और बालिका हितैषी पंचायतें बनाईं। जहां लड़कियां अब लीडरशिप भूमिकाएं निभा रही हैं। उन्होंने 2015 में सेल्फी विद डॉटर अभियान शुरू किया जो वैश्विक स्तर पर फैला।
वहीं गाली बंद घर, पीरियड चार्ट, लाडो पंचायत, एक पेड़ लाडो के नाम, लाडो पुस्तकालय, सेल्फी अगेंस्ट दहेज और वूमेनिया जीडीपी अभियान शामिल हैं। इनसे पुरुषों की सोच बदली, और बेटियां शिक्षा व खेल में आगे बढ़ीं।
जागलान के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री सन राइज (2019, निर्देशक विभा बक्शी) ने पितृतंत्र के खिलाफ उनकी लड़ाई दिखाई। यह फिल्म 73 देशों में प्रदर्शित हुई और 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म व सर्वश्रेष्ठ संपादन के पुरस्कार जीते। फिल्म ने लाखों लोगों को प्रेरित किया कि बेटियां बचाकर समाज को मजबूत बनाएं।