11जेएनडी23: नुक्कड नाटक में हिस्सा लेते कलाकार। संवाद
जींद। राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस के अवसर पर एक्टिव थियेटर एंड वेलफेयर सोसाइटी के सचिव और प्रसिद्ध रंगकर्मी रमेश मूर्ति भनवाला ने कहा कि सृष्टि का पहला नाटक संभवत कोई नुक्कड़ नाटक ही रहा होगा क्योंकि आदिम युग से ही घेरा बनाकर कहानियों को प्रदर्शित करने की परंपरा रही है। कहा कि नुक्कड़ नाटक ने हमेशा क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।
रमेश मूर्ति ने बताया कि भारत में आधुनिक नुक्कड़ नाटक को लोकप्रिय बनाने का श्रेय सफदर हाशमी को जाता है। उन्होंने कहा कि 19वीं सदी से शुरू हुई यह विधा 1943 में इप्टा के माध्यम से साम्राज्यवाद के विरुद्ध मजबूत हथियार बनी। सड़क, गली या चौराहों पर खेले जाने वाले ये नाटक दर्शकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यकाल के लोक नाटकों से लेकर स्वाधीनता संग्राम की प्रभात फेरियों तक, नुक्कड़ नाटक ने हमेशा क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। आज के दौर में जहां व्यावसायिक कंपनियां और सरकारी तंत्र अपनी नीतियों के प्रचार के लिए इसका सहारा ले रहे हैं, वहीं एक्टिव थियेटर जैसी संस्थाएं लगातार सामाजिक मुद्दों पर जन-जागरण कर रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस पर सभी रंगकर्मियों को बधाई दी