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ईक्कस के ग्रामीणों की कमाई का जरिया बनी पराली

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ट्रैक्टर-ट्रॉली में पराली को लादकर राजस्थान ले जाते लोग। - फोटो : Jind
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धान कटाई का समय आते ही पराली को लेकर काफी हो-हल्ला होने लगता है। कुछ किसान और किसान संगठन पराली को जलाना ही विकल्प बताते हैं, लेकिन ईक्कस गांव के कई किसानों ने पराली को आय का जरिया बना लिया है। यहां के किसान अब पराली को जलाते नहीं हैं, बल्कि इसका प्रबंधन कर बेचकर आमदनी करते हैं या फिर आधुनिक मशीनों से उसे खेत में मिला देते हैं, जिससे यह खाद के रूप में इस्तेमाल हो जाती है।
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ईक्कस गांव निवासी प्रगतिशील किसान छोटूराम के अनुसार धान की पराली को लेकर जो नजरिया बनाया गया है, वह सही नहीं है। पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और हर किसी को परेशानी होती है। ऐसे में उनके गांव में पिछले दो साल से पराली नहीं जलाई जाती है। यहां के किसान पराली को बेचते हैं। इसके लिए राजस्थान से व्यापारी आते हैं, जो प्रति एकड़ एक हजार रुपये में पराली खरीदते हैं। वे खुद ही पराली एकत्रित करते हैं। इससे किसानों को अलग से मेहनत या खर्च नहीं करना पड़ता है। छोटूराम के अनुसार यहां के किसानों में कापी जगरुकता आई है। इसका कारण यह है कि गांव में बाहर से ऐसे काफी लोग आते हैं जिनको पराली खरीदी होती है। कुछ लोग तो गांव में ही जमीन ठेके पर लेकर पराली को यहीं पर स्टोर करते हैं।
आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा
किसान छोटूराम के अनुसार गांव में आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। यह मशीन अनुदान पर मिल जाती है। इससे धान के अवशेषों को मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसकी अच्छी खाद बनती है और पैदावार भी अच्छी होती है।

छोटूराम।- फोटो : Jind

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