जींद। शहर से निकलने वाले कूड़े का सही निस्तारण करने के लिए नगर परिषद ने साढ़े तीन साल पहले योजना बनाई थी। इसके तहत ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करना था, लेकिन यह योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। इसकी फाइल बनाकर नगर परिषद ने शहरी स्थानीय निकाय मुख्यालय भेजी थी, लेकिन आज तक इस योजना की डीपीआर भी तैयार नहीं हुई है। यही वजह है कि योजना के कदम आगे नहीं बढ़ पाए हैं। कचरे का सही निस्तारण नहीं होने के कारण हांसी रोड पर स्थित डंपिंग साइट से बदबू उठती रहती है। इसका असर स्वच्छता रैंकिंग पर भी पड़ रहा है। यदि यह योजना सिरे चढ़ती है तो लोगों को काफी सुविधा होगी और इस कचरे के ढेर से उठने वाली बदबू से भी छुटकारा मिल सकेगा।
शहर की आबादी इस समय सवा दो लाख से ज्यादा है। प्रतिदिन शहर से कागजों के हिसाब से 125 टन कूड़ा निकलता है। इसमें सूखा तथा गीला दोनों प्रकार का कूड़ा होता है। शहर में सफाई का ठेका लेने वाले ठेकेदार ने अपनी जो गाड़ियां घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए लगा रखी हैं, उनमें से गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग डाला जाता है, लेकिन डंपिंग साइट पर इस कूड़े का सही निस्तारण नहीं हो रहा है। खासकर ठोस कूड़े का सही निस्तारण करने के लिए ठोस कूड़ा प्रबंधन संयंत्र लगाने की जरूरत है। यहां हांसी रोड पर लगभग 15 एकड़ में डंपिंग साइट है। यहां ठोस कचरे के ढेर लगे रहते हैं। इस कूड़े से बरसात के दिनाें में तो बहुत ज्यादा बदबू उठती है। आसपास के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब भी स्वच्छता रैंकिंग के लिए टीम आती है तो यहां का दौरा जरूर करती है। इसका शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी काफी असर पड़ता है।
तीन साल पहले खरीदी थी जमीन
नगर परिषद ने ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने के लिए हांसी रोड पर इसी जगह दस एकड़ जमीन करोड़ों रुपये में खरीदी थी ताकि यहां कूड़े का सही निस्तारण किया जा सके। नगर परिषद ने स्थानीय शहरी निकाय मुख्यालय को ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने के लिए प्रस्ताव भी भेजा था। मुख्यालय को इसकी डीपीआर तैयार करवानी थी, उसके बाद ही यहां काम शुरू किया जाना था, लेकिन आज तक यह योजना कागजों तक ही सिमट कर रह गई।
स्वच्छता रैंकिंग पर पड़ रहा असर
ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए बहुत जरूरी है। संयंत्र नहीं होने के कारण ही शहर की स्वच्छता रैंकिंग काफी पिछड़ जाती है। यहां अगर ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लग जाए तो शहर की स्वच्छता रैंकिंग में काफी सुधार की गुंजाइश है।
ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने के लिए प्रक्रिया जारी है। मुख्यालय से बात करके जल्द ही डीपीआर तैयार करवाई जाएगी। फिलहाल कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है। -डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद।