संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में कुछ दिनों से मानसून की गति धीमी हो गई है। इसके कारण एक बार फिर गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। सोमवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की गति 13 किलोमीटर प्रति घंटा रही, वहीं नमी की मात्रा 45 फीसदी दर्ज की गई।
सोमवार दोपहर तेज धूप और गर्म हवा चली। इससे तापमान में वृद्धि हुई और उमस भी बढ़ गई। लोगों को घरों से बाहर निकलने में कठिनाई हुई। मौसम में इस बदलाव का असर खेती पर भी दिख रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन कम हैं, वहां धान के खेतों में नमी घट रही है। पौधे सूखने लगे हैं।
किसान राजपाल, कृपाल सिंह, रोशन, सूरजमल, सतीश कुमार आदि ने बताया कि यदि अगले दो-तीन दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। धान के अलावा बाजरा, मक्का, कपास और सब्जियां भी बारिश की कमी से प्रभावित हो रही हैं। किसानों को ट्यूबवेल से अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है। बिजली आपूर्ति में बाधा आने पर सिंचाई करना भी मुश्किल हो रहा है।
इंसेट
बारिश होने तक खेतों में नमी बनाए रखें
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश होने तक खेतों में नमी बनाए रखें। जिन क्षेत्रों में संभव हो, वहां समय पर सिंचाई करें। आमजन और किसान दोनों अब मानसून की अगली बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अच्छी वर्षा से तापमान में गिरावट आएगी और खरीफ फसलों को भी लाभ मिलेगा।
वर्जन
मंगलवार से मौसम में बदलाव की उम्मीद है। बादल छाने और कई स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। वैसे अभी बारिश होने की कम ही उम्मीद है। -डॉ. राजेश, मौसम वैज्ञानिक, पांडू-पिंडारा जींद