लघु सचिवालय में स्टांप वेंडर अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। वेंडर लोगों से स्टांप पेपर और टिकटों के लिए 30 प्रतिशत अधिक वसूली कर रहे हैं। जिला प्रशासन की नाक के नीचे यह गोरखधंधा बिना किसी रोकटोक के चल रहा है। शहर के नई और पुरानी कचहरी में आधा दर्जन स्टांप वेंडर को लाइसेंस दिया गया है, लेकिन स्टांप पेपर और टिकट बेचने के लाइसेंस को स्टांप वेंडर लूट का लाइसेंस समझ बैठे हैं।
शायद यही कारण है कि स्टांप पेपर और टिकट पर मोटा कमीशन वसूला जा रहा है। इतना नहीं स्टांप पेपर के लिए वेंडर के नखरे अलग से उठाने पड़ते हैं। खुले पैसे नहीं होने पर स्टांप पेपर देने से साफ मना कर दिया जाता है। इससे लोग काफी परेशान हैं।
यहां पड़ती है जरूरत
जाति प्रमाण पत्र से लेकर, आय का प्रमाण पत्र, रैगिंग विरोधी शपथ पत्र, बेरोजगारी भत्ते के लिए शपथ पत्र, वाहन पंजीकरण, वाहन नाम कराने सहित तमाम सरकारी कार्यों में शपथपत्र देना पड़ता है। इसके लिए सरकार द्वारा दस रुपये का स्टांप पेपर निर्धारित किया गया है, लेकिन 10 रुपये के स्टांप पेपर का वेंडर 13 रुपये वसूल रहे हैं। तहसील सूत्रों के अनुसार एक दिन में करीब दो हजार शपथपत्र तैयार होते हैं। वहीं करीब इतने ही रुपये के रसीदी टिकट भी बेचे जाते हैं। हर दस रुपये के स्टांप पेपर और टिकट पर तीन रुपये अतिरक्ति लिए जाते हैं।
नहीं देते टिकट
स्टांप पेपर बेचने वालों की मनमानी सिर्फ अधिक पैसे लेने तक ही सीमित नहीं है। यहां टिकट के लिए साफ मना भी कर दिया है। उपभोक्ता के चक्कर काटने के बाद अधिक पैसे से में टिकट बेचे जाते हैं।
कम है कमीशन
सरकार द्वारा एक प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। यह बहुत कम है। इसके चलते उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं। ईमानदारी से काम करने पर प्रतिदिन 100 रुपये की कमाई भी नहीं हो पाती।
13 रुपये में दिया है स्टांप पेपर
मैंने बेरोजगार भत्ते के लिए शपथ पत्र देना है। इसके लिए 10 रुपये का स्टांप पेपर खरीदा है। लेकिन 13 रुपये देने पड़े। इसके लिए स्टांप वेंडर को बोला भी गया, लेकिन उसने 13 रुपये ही लिए।
नरेश, नगूरां
बॉक्स
चलती है मनमानी
बच्चों के एडमिशन के लिए दो शपथ पत्र देना हैं। इसके लिए दो स्टांप पेपर 10-10 रुपये के खरीदे। एक स्टांप पेपर 13 रुपये का तथा एक 12 रुपये का मिला। कई बार खुले पैसे के चक्कर में दस रुपये वाला स्टांप पेपर 15 रुपये का भी लेना पड़ता है।
राजेश, लोहचब
देने पड़ते हैं अधिक पैसे
पूरी तरह स्टांप वेंडरों की मनमानी चलती है। सभी वेंडर अपने हिसाब से अधिक पैसे लेते हैं। आखिरकार कागज तो उन्हीं से लेना है। ऐसे में अधिक पैसे देने के लिए उपभोक्ता मजबूर हैं।
कुलदीप, भगत सिंह कॉलोनी
मिली है शिकायत, होगी कार्रवाई
स्टांप वेंडरों का कमीशन तय किया गया है और उससे अधिक पैसे लेना गलत है। इसकी शिकायत पहले भी मिली है, जांच कराई जाएगी। उपभोक्ता वेंडर की रिकॉर्र्डिंग करके देता है तो, तुरंत लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
विरेंद्र सिंह सहरावत, एसडीएम