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Jind News: एक सप्ताह से एक्यूआई गंभीर, जिले में दमघोटू हवा बरकरार

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09जेएनडी25: जिले शाम के समय आसमान में छाया स्मॉग। संवाद
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जींद। जिले में एक्यूआई का स्तर एक सप्ताह से लगातार गंभीर बना हुआ है। इसके कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। रविवार को जिले का एक्यूआई 302 दर्ज किया गया। बाइक चालक और पैदल यात्री सांस लेने में परेशानी महसूस कर रहे हैं जबकि आंखों में जलन की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।
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शहर की जहरीली हवा से सांसों पर संकट बढ़ता जा रहा है। जिले में लगभग 20 दिन पहले ग्रैप दो को लागू किया था लेकिन इसकी पालना के लिए प्रशासन ने एक कदम भी नहीं उठाया। इसके चलते अब तक जिले में प्रदूषण की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
पिछले सात दिनों से जींद का एक्यूआई स्तर 280 से 300 के बीच स्थिर बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को यह 292 था जबकि शुक्रवार को 295 दर्ज किया गया। एक्यूआई की यह स्थिति बहुत खराब की तरफ बढ़ रही है जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
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जिले के मुख्य चौराहों, बस स्टैंड और आवासीय इलाकों में धुंध की मोटी चादर छा रही है। रात में जब तापमान गिरता है, तो प्रदूषक कण हवा में ज्यादा समय तक टिके रहते हैं जिससे सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। रात को बाइक व पैदल सफर करने वाले लोगों के लिए यह समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है। प्रदूषण ज्यादा होने के कारण रात को बाइक चलाते समय सांस फूल जाती है।
आंखों में जलन और सांस के मरीजों में बढ़ोतरी
नागरिक अस्पताल में एक सप्ताह से प्रदूषण से संबंधित बीमारी बढ़ रही है। इसमें आंखों में जलन, खांसी और सांस की तकलीफ की ओपीडी में बढ़ौतरी हुई है। हालांकि मरीजों का औसतन आंकड़ा 1500 से 1700 के मध्य का बना है लेकिन प्रदूषण से संबंधित बीमारी के मरीजों में वृद्वि हुई। चिकित्सकों के अनुसार पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंचकर अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को ट्रिगर कर रहे हैं।
हवा में नमी की कमी
मौसम विभाग के अनुसार नवंबर की शुरुआत में बारिश न होने से हवा में नमी की कमी है। जो प्रदूषण को फैलने से रोकती है। जिले में पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं हुई। इससे धूल और धुआं हवा में घुला हुआ है लेकिन सबसे बड़ा योगदान पराली जलाने का है।
वर्जन
सांस के मरीजों को इस समय मास्क लगाने की जरूरत है। रात के समय प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है। इस समय लोगों को घरों से बाहर निकलने से बचना चाहिए। 300 एक्यूआई में फेफड़ों पर ज्यादा प्रभाव होता है। बच्चों व बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक होता है।-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल, जींद
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