जींद। पिछले दिनों घोड़ों में आया ग्लैंडर्स संक्रमण खत्म नहीं हुआ है। दो महीने पहले जिले में एक घोड़े में ग्लैंडर्स संक्रमण की पुष्टि हुई थी। अब पशुपालन विभाग के पास सात घोड़ों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पशुपालन विभाग ने एरिया नोटिफाई करके रिपोर्ट सरकार के पास भेजी है। अब सरकार को फैसला करना है कि इस क्षेत्र में रहने वाले घोड़ों को मारा जाएगा या फिर केवल पॉजिटिव केस आए घोड़ों को ही मारा जाएगा।
पशुपालन विभाग ने इन घोड़ों के केयरटेकर के भी सैंपल लेकर स्वास्थ्य विभाग को भेजे थे। इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है क्योंकि यह वायरस मनुष्य में भी फैल सकता है। डेढ़ माह बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोबारा से केयरटेकर का सैंपल लिया जाएगा। नवंबर माह में शहर की एक मार्केट में एक व्यक्ति के घोड़े को टांग में चोट लगी थी। जख्म ठीक नहीं होने पर उसे हिसार ट्रीटमेंट के लिए ले जाया गया था तो घोड़े के लक्षण देखते हुए उसका ग्लैंडर्स बीमारी का सैंपल लिया गया था, जो जांच में पॉजिटिव मिला। उसके बाद पशुपालन विभाग द्वारा दूसरे कई घोड़ों के सैंपल भरे थे। जांच में सात घोड़े और पॉजिटिव पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने इन घोड़ों के तीन केयर टेकरों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे, ताकि यह पता चल सके कि ग्लैंडर्स बीमारी घोड़ों से केयर टेकर तक नहीं पहुंच गई हो। क्योंकि यह संक्रामक बीमारी है और फैलने का खतरा होता है। पशुपालन विभाग द्वारा अब कमेटी का गठन कर दिया गया है। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार से नोटिफाई होने के बाद ही घोड़ों को लेकर अगली कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घोड़े पशुपालन विभाग की देखरेख में हैं। डॉ. हुड्डा ने कहा कि संक्रमित घोड़े किस एरिया में मिले हैं, उसकी पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं कर सकते।