जींद। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (एचसीएमएस) के आह्वान पर चिकित्सकों की हड़ताल का दूसरे दिन ज्यादा असर रहा। पहले दिन एनएचएम के तहत लगे चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ कर्मियों के सहारे काम चल गया, लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार को एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर होने के चलते स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित रहीं। एंबुलेंस सेवा के आधे चालक हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया। जिन लोगों को शुक्रवार को ऑपरेशन करवाने थे वह नहीं हो पाए।
चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती दिखाई। जिन चिकित्सकों ने ओपीडी नहीं की, उनके कमरों पर ताले लगा दिए गए। वहीं प्रशिक्षु बीएएमएस, विकल्प के तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अनुबंध के आधार पर कार्यरत चिकित्सकों से काम चलाया गया। हड़ताल से पोस्टमार्टम, आपातकालीन सेवाएं बाधित रहीं। नागरिक अस्पताल में बीएएमएस, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), ग्रामीण क्षेत्रों के एनएचएम चिकित्सक ओपीडी देख रहे हैं। सामुदायिक, प्राथमिक, आयुष्मान मंदिरम केंद्रों पर फार्मेसी अधिकारी, एनएचम या अनुबंधित कर्मचारी मरीज देख रहे हैं।
15 मरीज पीजीआई रोहतक रेफर
वीरवार की तरह शुक्रवार को चिकित्सकों ने ओपीडी नहीं की। इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। जैसे ही कोई गंभीर मरीज अस्पताल में आता तो उसे पीजीआई रोहतक का रास्ता दिखा दिया जाता। शुक्रवार को 15 मरीजों को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया।
एनएचएम के 600 कर्मचारी भी हड़ताल पर
स्वास्थ्य विभाग के एनएचएम कर्मचारियों ने सांझा मोर्चा के बैनर तले चार दिवसीय हड़ताल का आगाज किया। जिले में कुल 600 कर्मचारी हैं। इनमें 15 चिकित्सक 300 स्टाफ नर्स, एंबुलेंस चालक व अन्य स्टाफ कर्मी हैं। एनएचएम कर्मियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया। सरकार की अनदेखी के विरोध में एनएचएम के तहत चलने वाली सभी सेवाओं को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है। इसमें ओपीडी, लेबर रूम, नर्सरी, रेफरल ट्रांसपोर्ट, मेंटल हेल्थ, स्कूल हेल्थ, एनएचएम कार्यालय व रिपोर्टिंग कार्य शामिल रहे। डाटा सहायक गौरव सहगल ने मांग की कि एनएचएम कर्मचारियों को पक्का किया जाए। सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए तथा सर्विस रूल के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए। एनएचएम कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए। एलटीसी, ग्रेच्युटी व एक्सग्रेशिया का लाभ दिया जाए। एनएचएम कर्मचारियों को सेवा के अनुसार ईएलए स्टडी लीव, ट्यूशन फीस का लाभ दिया जाए।
एचसीएमएस ने बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई
एचसीएमएस के जिलाध्यक्ष डाॅ. बिजेंद्र ढांडा, डाॅ. संदीप लोहान ने शुक्रवार को अस्पताल परिसर में बंद कमरे में बैठक की और आंदोलन को लेकर रणनीति बनाई। डाॅ. बिजेंद्र ढांडा ने कहा कि एसोसिएशन के किसी सदस्य ने शुक्रवार को न तो ओपीडी की है ओर न ही कोई अन्य काम किया है। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि उनकी मांगों को पूरा करें। डॉक्टरों की मांगों में विशेषज्ञ कैडर का गठन, केंद्र सरकार के डॉक्टरों के साथ समानता सुनिश्चित करने वाली करियर प्रगति योजना, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती न करना और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए बांड राशि में कमी की मांग को पूरा किया जाए।
एमएलसी, एमएलआर कटवाने में हुई परेशानी
हड़ताल के चलते एमएलसी, एमएलआर कटवाने में पुलिसकर्मियों व आमजन को परेशानी हुई। हालांकि हड़ताल में दंत चिकित्सक, आयुर्वेद और होम्योपैथिक चिकित्सक शामिल नहीं थे, इसलिए ओपीडी में बहुत ज्यादा परेशानी वाली स्थिति नहीं आई। शुक्रवार को कुल 1565 की ओपीडी हुई, जबकि वीरवार को 1549 ओपीडी हुई।
एंबुलेंस के आधे चालक हड़ताल पर
नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस सेवा के आधे चालक हड़ताल पर रहे। इस कारण 10 से ज्यादा एंबुलेंस नागरिक अस्पताल परिसर में खड़ी रही। गर्भवति महिलाओं को लाने और ले जाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चिकित्सकों की हड़ताल का स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। फील्ड से चिकित्सकों बुला कर स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल रखा गया है। इसके अलावा उन्होंने स्वयं ओपीडी व इमरजेंसी सेवाओं की मॉनिटरिंग की है। जहां भी कोई समस्या आई है, तुरंत प्रभाव से उसे दूर करवाया गया है। -डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन