जींद। होली पर्व पर प्रदेशी लोगों को अपने घर जाने के लिए अब राह आसान नहीं है। अवध-असम ट्रेन की सीटें फु ल हो चुकी हैं। टिकट कंफ र्म करने के लिए यात्रियों का नाम वेटिंग में भी नहीं आ रहा। लंबे मार्ग के लिए बसें भी कम हैं। लिहाजा यात्रियों को ट्रेन की बजाय निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसे लेकर नौकरी पेशा लोग काफी चिंतित हैं।
रंगों के त्योहार होली पर्व पर ज्यादातर लोग अपने घरों को जाते हैं। इसकी तैयारी काफी पहले शुरू हो जाती है। यही वजह है कि अधिकांश ट्रेनों में आरक्षित श्रेणी की सीटें फुल हो चुकी हैं। अवध-असम ट्रेन में आरक्षित सीटों के लिए वेटिंग में भी नंबर नहीं आ रहा है। लालगढ़ से रात पौने आठ बजे चलकर यह ट्रेन, हनुमानगढ़, बठिंडा, मानसा, जाखल होते हुए सुबह चार बजकर दस मिनट पर नरवाना पहुंचती है। यहां दो मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन सुबह चार बजकर 40 मिनट पर जींद जंक्शन पहुंचती है। यहां से रोहतक, बहादुरगढ़, दिल्ली, गाजियाबाद, रामपुर, हरदोई, लखनऊ, गोरखपुर, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर होते हुए न्यू तिनसुकिया जंक्शन पर पहुंचती हैं, लेकिन ट्रेन में जगह नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बस में लगता है ज्यादा किराया
जींद से केवल उत्तर प्रदेश व राजस्थान जाने के लिए ही बस है। हरिद्वार के लिए जींद से सुबह पांच बजकर 50 मिनट व मथुरा के लिए दोपहर 12 बजे बस जाती है। राजस्थान के सालासर के लिए जींद से सुबह 11 बजकर 40 मिनट व गंगानगर के लिए सुबह 11 बजकर दस मिनट पर बस है। ट्रेन की अपेक्षा बसों में यात्रियों का किराया दो से तीन गुना ज्यादा लगता है और यात्रियों को सामान रखने के लिए कम जगह मिलती है। वहीं ट्रेन में यात्रियों को सीट नहीं मिल पा रही है।
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लालगढ़ से डिब्रूगढ़ तक जाने वाली ट्रेन अवध-असम में सीट फुल हो गई हैं। त्योहारों पर ट्रेनों में रिजर्वेशन कराना मुश्किल होता है, क्योंकि त्योहारों पर ज्यादातर लोग अपने घरों को जाते हैं।
-जयप्रकाश स्टेशन अधीक्षक जींद जंक्शन